निवेश से पर्यटन तक झारखंड में विकास की नई बिसात, 1 लाख करोड़ के लक्ष्य के साथ गांवों और पहाड़ियों पर भी फोकस
टेक्सटाइल-फुटवियर उद्योग से रोजगार, पूर्वी सिंहभूम में बांस की खेती और कनहरी हिल पर कॉटेज—एक साथ तीन मोर्चों पर विकास की तैयारी
रांची। झारखंड में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने की कोशिश अब सिर्फ बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहने वाली है। एक तरफ राज्य सरकार एक लाख करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करने के लिए औद्योगिक और टेक्सटाइल-फुटवियर नीतियों को नए सिरे से लॉन्च करने की तैयारी कर रही है, तो दूसरी तरफ जिलों में स्थानीय संसाधनों और पर्यटन को आधार बनाकर आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने की योजनाएं भी आगे बढ़ रही हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सरकार की योजनाओं को देखें तो तस्वीर के तीन अलग-अलग हिस्से नजर आते हैं—बड़े निवेश से औद्योगिक रोजगार, बांस की खेती से ग्रामीण आय और पर्यटन ढांचे के विस्तार से स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति।

एक लाख करोड़ के निवेश से 25 हजार से ज्यादा रोजगार का लक्ष्य
राज्य सरकार झारखंड टेक्सटाइल, परिधान एवं फुटवियर नीति और झारखंड औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति को नए सिरे से लॉन्च करने की तैयारी में है। इन नीतियों के जरिए करीब एक लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके साथ ही 25 हजार से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने की तैयारी है।
टेक्सटाइल, परिधान और फुटवियर जैसे श्रम आधारित क्षेत्रों पर विशेष जोर इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनमें बड़े उद्योगों के साथ स्थानीय स्तर पर सप्लाई, परिवहन, पैकेजिंग और छोटे कारोबारों के लिए भी अवसर पैदा होते हैं।
नई नीतियों में निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाने और कारोबारी माहौल बेहतर करने पर भी जोर रहेगा।
गांवों में बांस बनेगा कमाई का जरिया
औद्योगिक निवेश के समानांतर पूर्वी सिंहभूम में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए 32 हेक्टेयर क्षेत्र में बांस के पौधे लगाने की योजना तैयार की गई है।
जिला उद्यान विभाग इस योजना पर करीब 8.64 लाख रुपये खर्च करेगा। यानी औसतन प्रति हेक्टेयर करीब 36 हजार रुपये की लागत निर्धारित की गई है।
खास बात यह है कि 32 हेक्टेयर में से 8 हेक्टेयर सरकारी जमीन होगी। सरकारी जमीन पर बांस की खेती के लिए होने वाला पूरा खर्च विभाग वहन करेगा और इसके लिए 100 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।
बांस सिर्फ खेती की फसल नहीं है। इसका इस्तेमाल फर्नीचर, हस्तशिल्प और घरेलू उपयोग की वस्तुओं सहित कई क्षेत्रों में होता है। ऐसे में योजना का मकसद खेती के साथ उससे जुड़े स्थानीय रोजगार और कारोबार को बढ़ावा देना भी है।
कनहरी हिल पर पर्यटन का नया ठिकाना
इसी कड़ी में हजारीबाग की कनहरी हिल पर पर्यटन सुविधाओं के विस्तार की तैयारी है। वन विभाग की ओर से पहाड़ी की चोटी पर छह आधुनिक कॉटेज तैयार कराए जा रहे हैं।
इन कॉटेज का निर्माण महाराष्ट्र की एक कंपनी आधुनिक तकनीक से कर रही है। पारंपरिक ईंट-सीमेंट निर्माण के बजाय आधुनिक निर्माण पद्धति अपनाई जा रही है, ताकि कॉटेज मौसम के अनुकूल और टिकाऊ रहें।
प्राकृतिक खूबसूरती के बीच ठहरने की सुविधा मिलने से कनहरी हिल को पर्यटन के लिहाज से नया आकर्षण मिलने की उम्मीद है। इसका फायदा होटल, परिवहन, स्थानीय दुकानदारों और अन्य पर्यटन आधारित सेवाओं को भी मिल सकता है।
तीन योजनाएं, एक बड़ी तस्वीर
इन तीनों पहलों को एक साथ देखें तो झारखंड में आर्थिक विकास का एक व्यापक मॉडल सामने आता है।
बड़े निवेश से उद्योग और रोजगार, बांस से ग्रामीण आय और कनहरी हिल जैसे पर्यटन स्थलों से स्थानीय कारोबार।
यानी राज्य सरकार एक तरफ बड़े पूंजी निवेश को आकर्षित करने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जिलों की स्थानीय संभावनाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश भी हो रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल इन योजनाओं के क्रियान्वयन का है। एक लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य कितना जमीन पर उतरता है, कितनी औद्योगिक इकाइयां स्थापित होती हैं,

















