JNU में फिर गूंजे विवादित नारे: "मोदी-शाह की कब्र खुदेगी", उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में प्रदर्शन

JNU में फिर गूंजे विवादित नारे: “मोदी-शाह की कब्र खुदेगी”, उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में प्रदर्शन

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JNU में फिर गूंजे विवादित नारे: “मोदी-शाह की कब्र खुदेगी”, उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में प्रदर्शन :देखे वीडियो

ननई दिल्ली, 6 जनवरी : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। सोमवार रात कैंपस में लेफ्ट समर्थित छात्र संगठनों द्वारा आयोजित प्रदर्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए गए।

वीडियो देखने के लिए लिंक में क्लिक करे ।

https://x.com/i/status/2008475840993259969

वायरल वीडियो में छात्रों को “मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, JNU की धरती पर” जैसे नारे लगाते सुना जा सकता है।यह प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2020 दिल्ली दंगों के आरोपियों उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज करने के विरोध में किया गया। प्रदर्शन साबरमती हॉस्टल के बाहर और ‘गुरिल्ला ढाबा’ के पास हुआ, जिसमें DSF, AISA और SFI जैसे संगठनों से जुड़े करीब 30-40 छात्र शामिल थे। यह आयोजन मूल रूप से 5 जनवरी 2020 की JNU हिंसा की बरसी को याद करने के लिए था, लेकिन बाद में नारे विवादित हो गए।J

JNU प्रशासन की प्रतिक्रिया:

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन नारों को “उत्तेजक और भड़काऊ” करार देते हुए गंभीर संज्ञान लिया है। चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर ने दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर FIR दर्ज करने की मांग की है। प्रशासन का कहना है कि ऐसे नारे लोकतांत्रिक असहमति के विपरीत हैं, JNU के आचार संहिता का उल्लंघन करते हैं और कैंपस की शांति भंग कर सकते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में 9 छात्रों के नाम भी सामने आए हैं, जिनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

बीजेपी का कड़ा विरोध:

भारतीय जनता पार्टी ने इसे “देशविरोधी” और “शहरी नक्सली” गतिविधि बताया। पार्टी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि ये नारे “टुकड़े-टुकड़े गैंग” की मानसिकता दिखाते हैं। प्रदीप भंडारी ने इसे “एंटी-इंडिया थॉट” का प्रदर्शन करार दिया। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने JNU को “टुकड़े-टुकड़े गैंग का हब” बताया। दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा और अन्य नेताओं ने भी सख्त कार्रवाई की मांग की।

पृष्ठभूमि:

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज कर दी, जबकि अन्य सह-आरोपियों को राहत दी। कोर्ट ने दोनों को “षड्यंत्र की योजना और रणनीति” में शामिल बताया। उमर और शरजील 2020 दिल्ली दंगों के “बड़ी साजिश” मामले में आरोपी हैं और पांच साल से अधिक जेल में हैं।यह घटना JNU के पुराने विवादों की याद दिलाती है, जहां पहले भी विवादित नारे लग चुके हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

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