सदर अस्पताल परिसर में बाउंड्री वॉल और रास्ते को लेकर बार एसोसिएशन और प्रशासन के बीच वार्ता छह फुट रास्ते से निकला समाधान
सदर अस्पताल परिसर में बाउंड्री वॉल और रास्ते को लेकर बार एसोसिएशन और प्रशासन के बीच वार्ता छह फुट रास्ते से निकला समाधान
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धनबाद: सदर अस्पताल परिसर में बाउंड्री वॉल और रास्ते को लेकर बार एसोसिएशन व स्वास्थ्य विभाग के बीच विवाद उग्र रूप ले चुका है। गुरुवार को स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि अधिवक्ताओं और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच आमने-सामने की नौबत आ गई।
पत्थरबाजी और दीवार क्षतिग्रस्त होने के आरोप-
प्रत्यारोप के बीच प्रशासन ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों के बीच वार्ता कराई और अधिवक्ताओं के लिए 6 फीट चौड़ा रास्ता उपलब्ध कराने का फैसला लिया।
विवाद की शुरुआत और कारण
विवाद सदर अस्पताल परिसर में बाउंड्री वॉल निर्माण से शुरू हुआ, जिसे अधिवक्ताओं ने कोर्ट परिसर तक जाने वाले पारंपरिक रास्ते और पार्किंग को ब्लॉक करने वाला बताया। अधिवक्ताओं का कहना है कि वर्षों से इस्तेमाल हो रहा यह रास्ता बंद होने से उनकी और वादकारियों की आवाजाही में भारी असुविधा हो रही है।
वहीं स्वास्थ्य विभाग इसे मरीजों की सुरक्षा, अस्पताल परिसर की व्यवस्था और हाल की घटनाओं (जैसे कोलकाता मेडिकल कॉलेज मामले) के बाद सुप्रीम कोर्ट दिशानिर्देशों के अनुपालन के लिए जरूरी बता रहा है।
गुरुवार की घटना
गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग ने आरोप लगाया कि अधिवक्ताओं ने दीवार तोड़ी और पत्थरबाजी की, जिससे उनकी जान को खतरा हुआ। बार एसोसिएशन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे साजिश करार दिया। एसोसिएशन अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी ने कहा कि अधिवक्ताओं की ओर से कोई हिंसा नहीं हुई, बल्कि कुछ अज्ञात तत्व भीड़ में घुसकर स्थिति बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की।
सूचना मिलते ही एसडीएम लोकेश बारंगे और डीएसपी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासन की मध्यस्थता में दोनों पक्षों से बातचीत हुई, जिसके बाद जिला प्रशासन ने कोर्ट परिसर में आवागमन सुगम बनाने के लिए 6 फीट चौड़ा रास्ता देने का निर्णय लिया।
दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया
बार एसोसिएशन अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी ने बताया कि प्रशासन के साथ सकारात्मक वार्ता हुई है। शुक्रवार को जनरल बॉडी मीटिंग बुलाई गई है, जिसमें पेन डाउन हड़ताल (जो 29 जनवरी से चल रही थी) समाप्त करने पर फैसला लिया जाएगा। उन्होंने आरोपों को निराधार बताते हुए जांच की मांग दोहराई।
दूसरी ओर स्वास्थ्यकर्मियों ने जिला प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि दीवार तोड़ने और पत्थरबाजी से उनकी सुरक्षा खतरे में है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो स्वास्थ्य सेवाएं (जैसे ओपीडी) बाधित की जा सकती हैं। स्वास्थ्यकर्मियों ने पहले मौन धरना और साइलेंट प्रोटेस्ट भी किया था।
प्रशासन की स्थिति
एसडीएम लोकेश बारंगे ने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी, जिसमें जमीन के दस्तावेज और नक्शे की जांच शामिल है। प्रशासन की प्राथमिकता शांति बहाल करना और दोनों पक्षों के बीच सहमति से स्थायी समाधान निकालना है। उपायुक्त आदित्य रंजन ने भी समाधान के लिए लगातार प्रयास करने की बात कही है।यह विवाद जनवरी के अंत से चल रहा है, जिसमें पेन डाउन हड़ताल, सड़क जाम, प्रदर्शन और झड़प जैसी घटनाएं हुईं।
फिलहाल 6 फीट रास्ते के फैसले से कुछ राहत मिली है, लेकिन स्थायी पार्किंग और रास्ते की व्यवस्था पर दोनों पक्ष अड़े हुए हैं। जांच के नतीजे और शुक्रवार की मीटिंग के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
















