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अखिल भारतीय कायस्थ महासभा (झारखंड प्रदेश) की कार्यकारिणी बैठक जमशेदपुर में संपन्न, समाज के भविष्य को दिशा देने वाले महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित

जमशेदपुर : अखिल भारतीय कायस्थ महासभा (झारखंड प्रदेश) की कार्यकारिणी बैठक आज एग्रीको क्लब हाउस, जमशेदपुर में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यह बैठक संगठनात्मक और सामाजिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रही, जिसमें समाज के विकास और सशक्तिकरण के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए।

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बैठक के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय और विशिष्ट अतिथि धनबाद के लोकप्रिय विधायक राज सिन्हा ने अपनी उपस्थिति से सभा का मान बढ़ाया। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सी. बी. सहाय ने की, जबकि संचालन प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष संजीव श्रीवास्तव ने किया।

सभा का शुभारंभ भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा पर पुष्पांजलि, आरती और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। प्रदेश के 15 जिलों के अध्यक्षों और प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस बैठक को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।

बैठक में पारित प्रमुख प्रस्ताव :

निःशुल्क सामूहिक विवाह योजना :

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए सामूहिक विवाह आयोजन की योजना, ताकि विवाह संस्कार को सरल और गरिमामय बनाया जा सके।

ज़िलावार स्टार्टअप प्रोत्साहन योजना : 

कायस्थ युवाओं में उद्यमिता और स्व-रोजगार को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक जिले में स्टार्टअप योजनाओं को प्रोत्साहित करने की रणनीति।

जिंगल ऐप’ को सशक्त बनाना : 

कायस्थ समाज को डिजिटल रूप से जोड़ने और सूचनाओं के प्रसार के लिए ‘जिंगल ऐप’ को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने का निर्णय।

रांची में राज्य स्तरीय सम्मेलन : 

नवंबर 2025 में रांची में एक भव्य कायस्थ सम्मेलन का आयोजन, जिसमें शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सरोकार और संगठन की दिशा पर विमर्श होगा।

नगर निगम चुनाव में भागीदारी :

आगामी नगर निगम चुनावों में कायस्थ समाज का सशक्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए जिला और नगर इकाइयों को रणनीति बनाने का निर्देश।

राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत ने अपने संबोधन में कहा कि कायस्थ समाज आज विभिन्न राजनीतिक दलों की उपेक्षा का शिकार है। यह समाज नेतृत्व के लिए बना है, परंतु आज हमारी राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी नगण्य है। हमें एकजुट होकर अपनी बौद्धिक और सामाजिक विरासत को पुनर्स्थापित करना होगा। उन्होंने एकता, सम्मान और सहयोग के बल पर एक सशक्त समाज के निर्माण पर बल दिया, जो राष्ट्र निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाए।

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