झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का निधन , दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में थे भर्ती, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर दी जानकारी।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का निधन , दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में थे भर्ती, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर दी जानकारी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!रांची/नई दिल्ली: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, जिन्हें प्यार से ‘दिशोम गुरु’ के नाम से जाना जाता है, अब इस दुनिया मे नही रहे । हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर दी इसकी जानकारी । उन्होंने लिखा आदरणीय दिशोम गुरुजी अब हमारे बीच नही रहे । आज मैं शून्य हो गया। जाहिर है शिबू सोरेन की तबीयत को लेकर हाल ही में कई खबरें सामने आई हैं। 81 वर्षीय शिबू सोरेन पिछले करीब एक महीने से दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती थे। जहां उनका इलाज चल रहा था। उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर झारखंड में चिंता का माहौल था, और उनके समर्थक व नेता उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे थे।

शिबू सोरेन को किडनी से संबंधित पुरानी बीमारी थी और वे पिछले एक साल से डायलिसिस पर भी थे। इसके अलावा, उन्हें हाल ही में ब्रेन स्ट्रोक का सामना करना पड़ा, जिसके कारण उनके शरीर के बाएं हिस्से में लकवा (पैरालिसिस) हो गया था जिसके बाद उन्हें गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
2 अगस्त, 2025 को उनकी हालत गंभीर हो गई थी, और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। हालांकि, 3 अगस्त को अस्पताल ने एक मेडिकल बुलेटिन जारी कर बताया कि उनकी स्थिति अब स्थिर है। डॉक्टरों ने बताया था कि उनकी तबीयत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है, लेकिन पूरी तरह स्वस्थ होने में अभी समय लग सकता है। विदेशी विशेषज्ञों से भी वीडियो कॉल के माध्यम से परामर्श लिया जा रहा था ताकि उनके इलाज में कोई कमी न रहे। शिबू सोरेन को डायबिटीज और हृदय संबंधी समस्याएं भी थी, और उनकी पहले एक बायपास सर्जरी भी हुई थी ।
नेताओं का तांता और समर्थन
शिबू सोरेन के स्वास्थ्य को लेकर झारखंड और देश भर के नेताओं ने गहरी चिंता जताई थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 26 जून, 2025 को अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल लिया और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी, विधायक कल्पना सोरेन से भी मुलाकात की थी झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, और झारखंड के कई अन्य नेताओं ने भी अस्पताल जाकर उनकी स्थिति की जानकारी ली थी ।
झारखंड में उनके समर्थकों और JMM कार्यकर्ताओं ने रजरप्पा के मां छिन्नमस्तिका मंदिर सहित कई धार्मिक स्थलों पर उनके स्वास्थ्य के लिए विशेष पूजा और प्रार्थनाएं की थी।
शिबू सोरेन का राजनीतिक योगदान
शिबू सोरेन, जिन्हें ‘दिशोम गुरु’ के नाम से जाना जाता था। झारखंड की राजनीति में एक कद्दावर नेता थे। उन्होंने 1972 में झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना की और अलग झारखंड राज्य के लिए आंदोलन का नेतृत्व किया था । जिसके परिणामस्वरूप 2000 में झारखंड राज्य का गठन हुआ। वे तीन बार (2005, 2008-09, 2009-10) झारखंड के मुख्यमंत्री रहे और वर्तमान में राज्यसभा सांसद थे । आदिवासी अस्मिता और अधिकारों की रक्षा के लिए उनका योगदान झारखंड में ऐतिहासिक माना जाता है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सक्रियता
शिबू सोरेन की तबीयत बिगड़ने की खबर मिलने के समय से ही उनके बेटे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तुरंत दिल्ली रवाना हो गए थे । वे अपने पिता के इलाज की हर प्रक्रिया पर नजर रखे हुए थे। 1 अगस्त को हेमंत सोरेन रांची में विधानसभा के मानसून सत्र में शामिल होने आए थे, लेकिन शुक्रवार को पिता की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही वे वन महोत्सव कार्यक्रम छोड़कर दिल्ली लौट गए। उनकी पत्नी कल्पना सोरेन और परिवार के अन्य सदस्य भी दिल्ली में मौजूद थे।
झारखंड में शोक का माहौल
शिबू सोरेन की निधन को लेकर झारखंड में शोक का माहौल है। झारखंड की राजनीति में उनकी अनुपस्थिति ने एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है, क्योंकि वे न केवल JMM के आधार स्तंभ थे, बल्कि आदिवासी समुदाय के लिए एक प्रेरणा भी थे।

















