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G-20 शिखर सम्मेलन 2025: मोदी ने विकास के नए मॉडल गढ़ने का किया आह्वान

G-20 शिखर सम्मेलन 2025: मोदी ने विकास के नए मॉडल गढ़ने का किया आह्वान

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डेस्क–दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में 22-23 नवंबर 2025 को आयोजित G-20 शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक विकास की नई दिशा पर जोर दिया। अफ्रीका में पहली बार हो रहे इस सम्मेलन की थीम ‘सॉलिडैरिटी, इक्वालिटी एंड सस्टेनेबिलिटी’ (एकजुटता, समानता और स्थिरता) के अनुरूप, पीएम मोदी ने ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाते हुए पुराने विकास मॉडलों की आलोचना की और तीन प्रमुख पहलें प्रस्तुत कीं। उनका संबोधन समावेशी, सतत और सभ्यतागत मूल्यों पर आधारित विकास पर केंद्रित रहा।

1) वैश्विक विकास मॉडल पर पुनर्विचार की आवश्यकता पर पीएम मोदी ने कहा, “कई दशकों से G-20 विश्व अर्थव्यवस्था को आकार देता रहा है।लेकिन वर्तमान विकास मॉडल ने बड़ी संख्या में समुदायों को संसाधनों से वंचित कर दिया है। इन मॉडलों ने प्रकृति का अंधाधुंध दोहन बढ़ाया, जिसका सबसे अधिक असर अफ्रीका और ग्लोबल साउथ पर पड़ा है। अब समय आ गया है कि हम विकास की दिशा बदलें।”
उन्होंने भारत की सभ्यतागत मूल्यों, विशेष रूप से ‘इंटीग्रल ह्यूमनिज्म’ (संपूर्ण मानवतावाद) को विकास का आधार बताया, जो संतुलित और समावेशी प्रगति सुनिश्चित करता है।

2) पीएम मोदी ने ग्लोबल साउथ और विश्व की चुनौतियों से निपटने के लिए तीन ठोस प्रस्ताव रखे:-

G-20 ग्लोबल ट्रेडिशनल नॉलेज रिपॉजिटरी: “भारत की समृद्ध परंपराओं के आधार पर एक वैश्विक पारंपरिक ज्ञान भंडार बनाया जाए। यह ज्ञान साझाकरण से विकास को नई ऊर्जा देगा, खासकर स्वास्थ्य और पर्यावरण क्षेत्र में।”

जी20 ग्लोबल हेल्थकेयर रिस्पॉन्स टीम: “स्वास्थ्य संकटों और प्राकृतिक आपदाओं के लिए G-20 देशों के विशेषज्ञों की एक त्वरित प्रतिक्रिया टीम गठित की जाए। सामूहिक शक्ति से हम ऐसी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं, जहां कोई अकेला नहीं लड़े।”

ड्रग-टेरर नेक्सस के खिलाफ G-20 इनिशिएटिव:
“नार्को-टेरर नेटवर्क्स का मुकाबला वैश्विक स्तर पर समन्वित प्रयासों से किया जाए। वित्तीय, शासन और सुरक्षा उपकरणों को एकीकृत कर अवैध व्यापार और आतंकवाद की फंडिंग को रोका जाए। यह आतंकवाद की प्रमुख राजस्व धारा को काटेगा।”

3)”ग्लोबल साउथ और अफ्रीका पर फोकस”–
अफ्रीका में हो रहे इस सम्मेलन से हमें ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने का अवसर मिला है। भारत ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य) की भावना से प्रतिबद्ध है। हम समावेशी विकास चाहते हैं, जहां कोई पीछे न छूटे।”
उन्होंने जलवायु परिवर्तन, ऋण राहत और महत्वपूर्ण खनिजों पर बहुपक्षीय सहयोग पर जोर दिया, साथ ही अमेरिकी बहिष्कार के बावजूद घोषणा पत्र को सराहा।

अन्य महत्वपूर्ण बिंदु–समावेशी विकास पर: “अब समय है कि हम विकास को समावेशी और सतत बनाएं। भारत की सफलता ‘बैक टू बेसिक्स’ और ‘फ्यूचर टू द मार्च’ के दृष्टिकोण से आई है।”

आईबीएसए और द्विपक्षीय चर्चाएं– सम्मेलन से इतर पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज से मुलाकात की और आईबीएसए शिखर सम्मेलन में भाग लिया, जहां ग्लोबल साउथ की एकजुटता पर बात हुई।
पीएम मोदी का यह संबोधन न केवल भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका को रेखांकित करता है, बल्कि ग्लोबल साउथ के लिए एक नया विकास रोडमैप भी प्रस्तुत करता है। सम्मेलन में अपनाए गए घोषणा पत्र में जलवायु कार्रवाई, शांति प्रयास और बहुपक्षीयता पर जोर दिया गया।

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