20250903 221111

जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक: टैक्स स्लैब में बड़े बदलाव, कई चीजों पर दरें घटीं, लग्जरी आइटम्स पर बढ़ीं

जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक: टैक्स स्लैब में बड़े बदलाव, कई चीजों पर दरें घटीं, लग्जरी आइटम्स पर बढ़ीं

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

नई दिल्ली, 3 सितंबर : भारत की जीएसटी प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव की घड़ी आ गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक आज और कल (3-4 सितंबर) नई दिल्ली में हो रही है। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस भाषण के बाद हो रही है, जिसमें उन्होंने ‘नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी रिफॉर्म्स’ की घोषणा की थी और कहा था कि दिवाली तक टैक्स दरों में कमी लाकर आम आदमी को बड़ी राहत दी जाएगी। बैठक में मौजूदा चार स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) को दो मुख्य स्लैब (5% और 18%) में बदलने का प्रस्ताव पास हो गया है। 12% और 28% स्लैब को पूरी तरह हटा दिया गया है, जबकि लग्जरी और ‘सिन’ गुड्स (जैसे तंबाकू, शराब, महंगे वाहन) के लिए नया 40% स्लैब लागू किया गया है। इससे रोजमर्रा की वस्तुओं पर टैक्स कम होगा, लेकिन लग्जरी आइटम्स महंगे हो जाएंगे।

यह सुधार जीएसटी को सरल बनाने, अनुपालन आसान करने और अर्थव्यवस्था को गति देने का लक्ष्य रखते हैं। काउंसिल ने इन बदलावों को 22 सितंबर से लागू करने का फैसला किया है, जो दिवाली से पहले उपभोक्ताओं को राहत देगा। हालांकि, विपक्षी राज्यों ने राजस्व हानि की चिंता जताई है और मुआवजे की मांग की है। आइए, पूरी खबर विस्तार से जानते हैं।

जीएसटी काउंसिल की बैठक का बैकग्राउंड
जीएसटी काउंसिल भारत का सर्वोच्च टैक्स निर्णय लेने वाला निकाय है, जिसमें केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्री शामिल होते हैं। 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से 55 बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन यह 56वीं बैठक सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पिछली बैठक दिसंबर 2024 में जयसलमेर में हुई थी। इस बार की बैठक में ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GoM) की सिफारिशों पर चर्चा हुई, जिसमें रेट रेशनलाइजेशन, इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर सुधार और कंपेंसेशन सेस का भविष्य प्रमुख मुद्दे थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “पिछले आठ वर्षों में हमने जीएसटी में बड़ा सुधार किया। अब ‘नेक्स्ट जेनरेशन’ सुधार ला रहे हैं, जो टैक्स बोझ कम करेगा।” बैठक में केंद्र ने प्रस्ताव रखा कि 12% स्लैब के 99% आइटम्स 5% में और 28% स्लैब के 90% आइटम्स 18% में शिफ्ट हो जाएं। GoM ने इसे मंजूरी दी। साथ ही, कंपेंसेशन सेस को 31 अक्टूबर 2025 तक समाप्त करने का फैसला हुआ, जो मार्च 2026 से पहले है।

जीएसटी स्लैब में क्या बदलाव हुए?
मौजूदा जीएसटी स्लैब जटिल थे, जिससे वर्गीकरण विवाद बढ़ते थे। अब सिस्टम सरल हो गया है:
– मुख्य स्लैब: 5% (एसेंशियल गुड्स के लिए) और 18% (स्टैंडर्ड रेट)।
– 12% स्लैब हटाया गया:इसके अधिकांश आइटम्स 5% में शिफ्ट।
– 28% स्लैब हटाया गया: ज्यादातर आइटम्स 18% में, लेकिन लग्जरी के लिए नया 40% स्लैब।
– 0% स्लैब विस्तार:लगभग 47 आइटम्स पर जीएसटी शून्य, जैसे कुछ फूड आइटम्स।
– कंपेंसेशन सेस: 31 अक्टूबर तक खत्म, उसके बाद हेल्थ और क्लीन एनर्जी सेस की संभावना।

ये बदलाव अनुपालन लागत कम करेंगे और टैक्स बेस बढ़ाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उपभोग बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को 1-2% का बूस्ट मिलेगा।

किन चीजों में जीएसटी स्लैब कम हुआ?
बैठक में कई सेक्टर्स को राहत मिली। मुख्य रूप से एसेंशियल गुड्स, हेल्थकेयर, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पर फोकस रहा। नीचे टेबल में प्रमुख आइटम्स और नए रेट्स दिए गए हैं:

| श्रेणी | पुराना रेट | नया रेट | प्रभावित आइटम्स के उदाहरण …
एसेंशियल फूड आइटम्स | 12% | 5% या 0% | घी, नट्स, पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर (20 लीटर), नमकीन, पनीर, खाखरा, चपाती, रोटी, पिज्जा ब्रेड, टूथपेस्ट, शैंपू, हेयर ऑयल, साबुन, टैल्कम पाउडर। (करीब 175 आइटम्स सस्ते) |
हेल्थकेयर और मेडिसिन| 12% | 5% | दवाइयां, मेडिकल डिवाइसेस, हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम। |
टेक्सटाइल्स और फुटवियर| 12% | 5% | कपड़े (₹2,500 से नीचे), जूते, हैंडलूम प्रोडक्ट्स (कुछ पर 0%)। (₹2,500 से ऊपर 18%) |
| कंज्यूमर ड्यूरेबल्स | 28% | 18% | एयर कंडीशनर, डिशवॉशिंग मशीन्स, व्हाइट गुड्स (फ्रिज, वॉशिंग मशीन), इलेक्ट्रॉनिक्स। |
ऑटोमोबाइल | 28% | 18% | छोटी कारें, टू-व्हीलर्स (कम CC वाले), साइकिल्स। ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) पर 5% (₹40 लाख तक)। |
अन्य | 12% | 5% | बिस्किट, पास्ता, चीज, जाम, मेयोनीज, वुडन फर्नीचर, कार्पेट्स, जूट/कॉटन बैग्स, फर्टिलाइजर्स, पेपर, पैकेजिंग। |

कुल प्रभाव: 12% स्लैब के 99% आइटम्स 5% पर, 28% के 90% 18% पर शिफ्ट। इससे FMCG, टेक्सटाइल, ऑटो और हेल्थकेयर सेक्टर को फायदा। उदाहरण के लिए, टूथपेस्ट और शैंपू सस्ते होंगे, जिससे घरेलू खर्च कम होगा।
शून्य रेट आइटम्स:47 आइटम्स जैसे कुछ पैकेज्ड फूड्स (लूज बेचे जाने पर), आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स (अनब्रांडेड), जिन थैरेपी पर 0%।

ये कमी इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर (इनपुट टैक्स > आउटपुट टैक्स) को ठीक करेगी, जिससे बिजनेस का वर्किंग कैपिटल फ्री होगा।

क्या-क्या बढ़ा: लग्जरी और सिन गुड्स पर फोकस
राहत के साथ कुछ आइटम्स पर टैक्स बढ़ा भी है, ताकि राजस्व संतुलित रहे। मुख्य रूप से लग्जरी और हानिकारक गुड्स पर:
– नया 40% स्लैब: हाई-एंड ऑटोमोबाइल्स, SUVs, प्रीमियम ईवी (₹40 लाख से ऊपर), तंबाकू, पान मसाला, सिगरेट्स, एरेटेड बेवरेजेस (सॉफ्ट ड्रिंक्स)।
– अन्य बढ़ोतरी:
– रेडीमेड गारमेंट्स (₹2,500 से ऊपर): 12% से 18%।
– सिन गुड्स पर अतिरिक्त लेवी: टobacऑ, अल्कोहल (GST के अलावा)।
– एयर फ्रेट: 18% (सी फ्रेट 5% से ऊपर लाने की चर्चा, लेकिन अभी 18%)।
– प्रभाव:ये बदलाव राजस्व बढ़ाएंगे (अनुमानित ₹2 लाख करोड़ सालाना), लेकिन लग्जरी आइटम्स महंगे होंगे। उद्योगों ने चिंता जताई है कि इससे डिमांड प्रभावित हो सकती है।

अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं पर प्रभाव
ये सुधार अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे:
– उपभोक्ता लाभ: दैनिक वस्तुओं पर 7-10% कीमतें कम, खरीदारी बिल सस्ता।
– बिजनेस को फायदा: MSMEs के लिए कम अनुपालन, टेक्सटाइल और फुटवियर में इनवर्टेड स्ट्रक्चर ठीक।
– राजस्व:न शुरुआत में नुकसान, लेकिन ज्यादा कंजम्पशन से रिकवरी। अगस्त 2025 में GST कलेक्शन ₹1.86 लाख करोड़ (6.5% बढ़ोतरी)।
– चुनौतियां: विपक्षी राज्य (केरल, तमिलनाडु, पंजाब) राजस्व हानि (₹2 लाख करोड़) का डर, मुआवजा मांग रहे। ऑटो सेक्टर में अनिश्चितता से सेल्स प्रभावित।

बदलाव 22 सितंबर से लागू होंगे। काउंसिल ने प्री-फिल्ड रिटर्न्स, ऑटोमेटेड रिफंड्स और ड्रोन पर 5% GST की भी मंजूरी दी। ऑनलाइन गेमिंग और ई-कॉमर्स पर स्पष्टता आएगी। कुल मिलाकर, यह जीएसटी 2.0 का दौर है, जो भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।

Share via
Share via