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हेमंत सरकार को बैल के सींग की मार झेलने को तैयार रहना चाहिए: आदित्य साहू

झारखंड विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन और उनके बेटे पर ‘बैल’ वाले अपमानजनक बयान पर भाजपा ने जोरदार हमला बोला है। भाजपा प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने आज गढ़शिला में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हेमंत सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार को बैल के सींग की मार झेलने को तैयार रहना चाहिए, क्योंकि जनता लूट-झूठ से तंग आ चुकी है।

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आदित्य साहू ने कहा, “मुख्यमंत्री की नजरों में जो बैल है, वह लाखों जनता द्वारा चुना हुआ जन प्रतिनिधि है। आदिवासी समाज का अगुआ है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि चंपई सोरेन राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हैं, आदिवासी समाज के प्रमुख नेता हैं और लंबे समय से लाखों लोगों के प्रतिनिधि बने हुए हैं। ऐसे में उन्हें ‘बैल’ कहकर अपमानित करना न केवल व्यक्तिगत हमला है, बल्कि पूरे आदिवासी समाज का अपमान है।

बैल का महत्व भूल गई हेमंत सरकार

आदित्य साहू ने बैल को गांव, गरीब और किसान की पहचान बताते हुए कहा, “बैल करोड़ों लोगों के पेट भरने में सहयोगी है। लेकिन कुछ लोग बैल से काम लेने के बाद उसके महत्व को भूल जाते हैं। मालिक होने का अहंकार सिर चढ़ जाता है।” उन्होंने चेतावनी दी कि आज बैल गुस्से में है, आक्रोशित है और जनता उसी के साथ खड़ी है। बैल के अपमान का बदला जनता ही लेगी।

जनता ऊब चुकी लूट-भ्रष्टाचार से

साहू ने हेमंत सरकार पर विकास के नाम पर लूट का आरोप लगाते हुए कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। बालू, पत्थर, खान-खनिज संसाधनों की लूट मची हुई है। युवा निराश हैं, महिलाएं असुरक्षित महसूस कर रही हैं। यहां तक कि राज्य की बेटियां अब स्कूलों में भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने कहा, “ऐसे हालात से झारखंड को उबारने के लिए जनता कमर कस चुकी है।”

यह बयान गढ़शिला विधानसभा उपचुनाव के संदर्भ में आया है, जहां भाजपा उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन (पूर्व सीएम चंपई सोरेन के बेटे) और झामुमो के उम्मीदवार सोमेश सोरेन के बीच कांटे की टक्कर है। हेमंत सोरेन ने हाल ही में एक रैली में चंपई सोरेन और उनके बेटे को ‘जेएमएम में मोटा होने वाले बैल’ बताया था, जो भाजपा के खेत में हल चलाने चले गए। इस पर चंपई सोरेन ने भावुक होकर कहा था कि यह न केवल उनके परिवार का, बल्कि झारखंड आंदोलन का अपमान है।

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