झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ED अधिकारियों के खिलाफ FIR की जांच अब CBI करेगी
झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ED अधिकारियों के खिलाफ FIR की जांच अब CBI करेगी
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रांची, 11 मार्च – झारखंड हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दो अधिकारियों द्वारा दायर याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए रांची पुलिस द्वारा दर्ज FIR की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति एस.के. द्विवेदी की एकल पीठ ने बुधवार को यह आदेश जारी किया, जिससे ED और राज्य पुलिस के बीच चल रहे तनाव पर विराम लगने की उम्मीद है।
मामले की पृष्ठभूमि क्या है?
यह विवाद जनवरी 2026 में शुरू हुआ था, जब पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कर्मचारी संतोष कुमार (जिनके खिलाफ ED द्वारा 23 करोड़ के कथित घोटाले की मनी लॉन्ड्रिंग जांच चल रही है) ने ED कार्यालय में पूछताछ के दौरान मारपीट का आरोप लगाया। संतोष कुमार ने एयरपोर्ट थाना में ED के दो अधिकारियों – असिस्टेंट डायरेक्टर प्रतीक और असिस्टेंट एनफोर्समेंट ऑफिसर शुभम भारती – के खिलाफ FIR दर्ज कराई।
इसके बाद 15 जनवरी को रांची पुलिस ने ED कार्यालय पर छापेमारी की, जिसे हाईकोर्ट ने “पूर्व नियोजित” करार दिया था।
कोर्ट ने पुलिस जांच पर रोक लगाई और ED कार्यालय की सुरक्षा के लिए केंद्रीय पैरामिलिट्री फोर्स (BSF/CISF) तैनात करने का निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिए?
न्यायमूर्ति एस.के. द्विवेदी की अदालत ने ED की याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था (24 फरवरी 2026)।
अब बुधवार को कोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए:CBI में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए और मामले की पूरी जांच CBI द्वारा की जाए।
राज्य पुलिस को सभी संबंधित दस्तावेज़, सबूत और फाइलें तुरंत CBI को सौंपने होंगे।
जांच में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए CBI को स्वतंत्र रूप से कार्य करने की छूट।
ED पक्ष की ओर से SGI एस.वी. राजू, अधिवक्ता ए.के. दास और सौरभ कुमार ने याचिका दायर कर पुलिस जांच में पक्षपात की आशंका जताई थी और CBI जांच की मांग की थी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
ED और राज्य पुलिस के बीच बढ़ते टकराव को देखते हुए यह फैसला संघीय एजेंसी की स्वायत्तता को मजबूती देता है।
पहले हाईकोर्ट ने पुलिस कार्रवाई को “प्री-प्लान्ड” बताया था और जांच पर रोक लगाई थी।
अब CBI जांच से मामले की निष्पक्ष जांच होने की संभावना बढ़ गई है, जिससे पेयजल घोटाले की मूल जांच पर असर नहीं पड़ेगा।
यह फैसला झारखंड में केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस के बीच संबंधों पर नजर रखने वालों के लिए अहम माना जा रहा है।
















