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चुटिया में ऐतिहासिक होलिका दहन : 500 साल पुरानी परंपरा के अनुसार फगुआ काटा, होलिका प्रज्वलित

झारखंड की राजधानी राँची के ऐतिहासिक चुटिया नगरी में रविवार रात परंपरागत रूप से होलिका दहन संपन्न हुआ। यह स्थल, जो कभी नागवंशी राजाओं की राजधानी रहा, आज भी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां होलिका दहन झारखंड में सबसे पहले होता है और यह पूरे क्षेत्र में होली उत्सव की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

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परंपरा के अनुसार फगुआ काटने की रस्म

रात करीब 10:30 बजे शुभ मुहूर्त में ग्राम पाहन ने स्नान कर नए वस्त्र धारण किए। एक लोटा जल और फरसा लेकर डोल जतरा मैदान पहुंचे। उन्होंने एक ही वार में अरंडी की डाल को काटकर फगुआ काटने की रस्म पूरी की और बिना पीछे मुड़े घर लौट गए। यह अनुष्ठान नागवंशी काल से चली आ रही विशेष परंपरा है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देती है।

श्रीराम मंदिर में पूजा-अर्चना और होलिका दहन

इसके बाद श्रीराम मंदिर (जिसे राधाबल्लभ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है) के महंत ने विधिवत पूजा-अर्चना की। होलिका प्रज्वलित की गई और आरती उतारी गई। दहन से पहले रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। सैकड़ों श्रद्धालु इस पावन क्षण के साक्षी बने और होलिका की परिक्रमा की।

ऐतिहासिक महत्व

चुटिया में 1685 ईस्वी में स्थापित श्रीराम मंदिर धार्मिक केंद्र है। यहां होलिका दहन की परंपरा लगभग 500 वर्ष पुरानी मानी जाती है, जो नागवंशी राजाओं के समय से चली आ रही है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और आस्था का जीवंत प्रतीक है। फगडोल जतरा मैदान में यह आयोजन फगडोल जतरा समिति के नेतृत्व में होता है।

इस अनोखी परंपरा से चुटिया न केवल राँची बल्कि पूरे झारखंड में होली की शुरुआत का प्रतीक बन जाता है। होली के रंगों से पहले यहां की आग बुराई को जला कर नई शुरुआत का संदेश देती है।

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