illegal houses

शहरों में बिना नक्शे के बने तीन मंजिल तक के अवैध मकानों ( illegal houses) को वैध करने के लिए नई नीति लाएगी सरकार लेकिन आदिवासी खातों में बने घर नहीं होंगे नियमित !

 

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झारखंड सरकार एक बार फिर से पुरे राज्य में शहरों में बिना नक्शे के बने तीन मंजिल तक के अवैध मकानों ( illegal houses) को वैध करने के लिए नई नीति लाएगी। आचार संहिता लगने से पहले ही सरकार इस नीति को लागू करने की तैयारी में है। एक अनुमान के अनुसार इस फैसले से राज्य के करीब सात लाख और सिर्फ रांची में ही करीब 1.25 लाख मकान मालिकों को सीधा फायदा होगा। उच्चस्तरीय बैठक में इस पर चर्चा के बाद नियमावली तैयार की जा रही है। फिर इसे कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलते ही नई नीति लागू हो जाएगी। राज्य में नगर निकाय चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। हालांकि अवैध मकानों का सटीक आंकड़ा सरकार के पास भी नहीं है। यह नीति पूर्व की भाजपा सरकार द्वारा बनाई गई बिल्डिंग रेगुलराइजेशन पॉलिसी से काफी सरल होगी, जिससे एकमुश्त राशि लेकर ऐसे मकानों को वैध किया जा सके।

रांची में 2.33 लाख घर, पर नक्शा 33 हजार का ही
अनुमान के मुताबिक अभी रांची  में कुल 2.33 लाख मकान हैं। इनमें करीब 33 हजार मकानों का ही नक्शा पास है। ऐसे में करीब दो लाख मकान मालिक हमेशा डर के साए में रहते हैं। नगर निगम या आरआरडीए में जैसे ही अधिकारी बदलते हैं, सैकड़ों मकान मालिकाें पर अवैध निर्माण का केस दर्ज होता है। निगम के कर्मचारी भी ऐसे मकान मालिकों से अवैध वसूली करते हैं।

रघुवर सरकार में लागू हुई नीति, पर रांची में सिर्फ 220 घर ही हुए वैध
वर्ष 2019 में रघुवर कैबिनेट ने विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले बिल्डिंग रेगुलराइजेशन पॉलिसी को मंजूरी दी थी। लेकिन नियमावली इतनी जटिल थी कि चंद लोगों को ही फायदा मिला। रांची में करीब 300 आवेदन आए। इनमें से 220 मकानों को जुर्माना लेकर वैध किया गया। इससे पहले 2011 में भी बिल्डिंग रेगुलराइजेशन पॉलिसी लाई गई थी। उस समय नगर निगम में 870 आवेदन जमा हुए थे, लेकिन मात्र 280 घरों का नक्शा पास हुए।

पहले की पॉलिसी में ये थी खामियां, नई में बदलाव होंगे

1. 500 वर्गमीटर क्षेत्रफल में बने घरों को ही वैध करने का नियम था। शर्त थी कि आदिवासी खाते की जमीन या ग्रीन लैंड या ओपन स्पेस में घर बना है तो वह नियमित नहीं होगा। ऐसे में करीब 50 हजार घरों को वैध करने का मामला फंस गया। क्योंकि वे ऐसी ही प्रकृति की जमीन पर बने हैं। नई पॉलिसी में भी ये शर्तें रहेंगी। ऐसे में अब करीब 75 हजार घर अवैध ही रहेंगे।

2. तीन मंजिला घरों में फ्रंट सेट बैक और एक ओर साइड सेट बैक को अनिवार्य किया गया था। जबकि शहरों में 90% निजी घरों में फ्रंट और साइड सेट बैक नहीं छोड़ा गया है। नई पॉलिसी में सड़क की चौड़ाई के आधार पर फ्रंट सेट बैक को अनिवार्य किया जा सकता है। तीन मंजिल तक का भवन जैसा बना है, उसे कुछ शर्तों के साथ स्वीकृति मिल सकती है।

3. जुर्माना राशि काफी अधिक तय की गई थी। एक हजार वर्गफीट के घर को नियमित करने पर एक लाख रुपए से अधिक जुर्माना था। नई पॉलिसी में जुर्माने की राशि कम रखने पर विचार चल रहा है।

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