Illegal mining

मनरेगा घोटाला से जाँच का दायरा अवैध खनन (Illegal mining) की ओर सूत्र : पूजा सिंघल केस

झारखण्ड में अवैध खनन (Illegal mining) का कारोबार नया नहीं है।  हलाकि पहली बार किसी बड़े अधिकारी पर  बड़ी जाँच एजेंसी की शिकंजा कसा  है इस शिकंजे में एक आईएएस अफसर  का गर्दन फसने के बाद झारखण्ड की कई और बड़े अधिकारी और नेताओ की फसने की संभावना बढ़ गयी है।  पूजा सिंघल पर ED का रेड तो मनरेगा घोटाला से शुरू हुआ था लेकिन सूत्र बताते है की ED ने जब अपना जाँच का दायरा आगे बढ़ाया तो मनेरगा घोटाला  के साथ साथ अवैध माइनिंग और हवाला कारोबार का कच्चा चिठ्ठा भी सामने आया है जिसे जल्द ही ED झारखण्ड हाईकोर्ट के सामने पेश करेगी। वैसे झारखण्ड में अवैध खनन का कारोबार का अनुमान लगाना झारखण्ड में किसी के बस की बात नहीं है हर दिन करोड़ो का काला कारोबार झारखण्ड के कई जिलों से होता है जिसमे धनबाद ,हाजिरबाग ,चतरा ,रामगढ़ ,जामताड़ा ,पाकुड़ ,चाईबासा जैसे जिले प्रमुख है।  CAG की आडिट रिपोर्ट और शाह आयोग की पिछली पड़ताल को एक नजर देखने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि झारखंड का खान विभाग जितना राजस्व हर वर्ष जुटाता है, तकरीबन उसका आधे का अवैध खनन का कारोबार होता है। कोयला, आयरन ओर से लेकर बालू, पत्थर, लाइम स्टोन सभी इसकी जद में शामिल हैं लेकिन ED का यह रेड आने वाले समय में झारखण्ड कई कई काला कारोबार में करोडो की कमाई करने वाले सफ़ेद नकाबपोश को बेनकाब कर सकता है।

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झारखण्ड में अवैध कारोबार को लेकर  न्यायमूर्ति एमबी शाह आयोग ने अपनी रिपोर्ट में झारखंड में 22,000 करोड़ रुपये का अवैध खनन का खुलासा किया था। वर्ष 2014 में संसद और राजयसभा दोनों में पेश रिपोर्ट में सनसनीखेज खुलासे किए गए थे। इसमें अवैध खनन के तमाम तरीकों और कारणों का खुलासा किया गया था और खनन कंपनियों के साथ साठगांठ करने वाले अधिकारियों को दंडित करने का सुझाव भी दिया गया था। यह रिपोर्ट वर्ष 2000-2010 के बीच के आयोग के अध्ययन पर आधारित थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि 40 डालर प्रतिटन के औसत मूल्य पर 2000-2010 के बीच रायल्टी का भुगतान किए बिना लौह अयस्क के अवैध निर्यात का मूल्य 2,747 करोड़ रुपये बैठता है।

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अवैध खनन को लेकर राज्य सरकार को पीएजी भी चेता चुकी है। पूर्व में CAG ने अपनी आडिट रिपोर्ट में कहा था वित्तीय वर्ष 2010-11 और 2011-12 में जिला खनन कार्यालयों ने खान विभाग के राजस्व को 2078 करोड़ का नुकसान पहुंचाया है। रायल्टी दर का गलत आकलन, कोयले की ग्रेडिंग कम करने, लीज अवधि समाप्त होने के बावजूद खनन तथा बकाया में ब्याज की गणना गलत तरीके से करने से यह नुकसान हुआ है।

झारखण्ड में कनीज प्रचुर मात्रा में है लेकिन यहाँ की जनता गरीब है ,आरोप है की इस 22 साल में जनता के हाँथ तो कुछ नहीं आया लेकिन नेता ,पत्रकार ,पुलिस और प्रशासन के गठजोड़ ने झारखण्ड को खूब लुटा ,आरोप है की सिर्फ मधु कोड़ा के समय में ही कई लीज गलत तरीके से बांटे गए जिसमे झारखण्ड को करोडो के राजस्व का नुकसान हुआ था। आरोप है की  रिश्ते और पैरवी के आधार पर लोगों को खनन पट्टे दिए गए। गढ़वा में ऐसा ही एक मामला सामने आया है। विद्या शर्मा के नाम से जारी एक खनन पट्टे में स्थल जांच प्रतिवेदन देखने से पता चलता है कि लाभुक के पति ने ही स्थल जांच प्रतिवेदन में अपनी गवाही दी है। इनका नाम अशोक कुमार है। निगम में  बड़े ओहदे पर है अशोक कुमार पर आरोप है कि उन्होंने एक बार इस्तेमाल के लिए जारी चालान को कई बार इस्तेमाल किया और विभाग ने इस मामले में उनपर प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई।  बताया जाता है की झारखण्ड में हर दिन कई सौ करोड़ का अवैध उत्खन और ट्रांसपोर्टिंग का काला कारोबार होता है जिसमे कई सिंडिकेट काम करते है और उस सिंडिकेट पर कोई हाँथ नहीं दाल सकता है क्युकी आरोप है की उस सिंडिकेट पर ऊपर का हाथ होता है।

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