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जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम में मंईयां सम्मान योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, फर्जी पतों पर 183 अल्पसंख्यक महिलाओं को मिला लाभ

जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम में मंईयां सम्मान योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, फर्जी पतों पर 183 अल्पसंख्यक महिलाओं को मिला लाभ
जमशेदपुर, 15 मई : पूर्वी सिंहभूम जिले में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के बाद अब मंईयां सम्मान योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। घाटशिला अनुमंडल के गुड़ाबांधा और घाटशिला प्रखंड की बालीजुड़ी और हेंडलजुड़ी पंचायतों में 183 ऐसी महिलाओं को योजना की राशि दी गई, जो इन पंचायतों की निवासी ही नहीं हैं। ये पंचायतें आदिवासी बहुल हैं, जहां अल्पसंख्यक समुदाय का कोई व्यक्ति नहीं रहता। फिर भी, हेंडलजुड़ी में 409 लाभुकों में 174 और बालीजुड़ी में 275 लाभुकों में 90 अल्पसंख्यक महिलाओं ने योजना की दो किस्तें हासिल कर ली हैं।

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फर्जी पतों और बाहरी राज्यों के मोबाइल नंबर का खुलासा
जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि इन लाभुकों के मोबाइल नंबर झारखंड के नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार के हैं। जिले में कुल 2,912 बैंक खातों से दो या अधिक लाभुकों ने योजना का लाभ लिया है। इनमें पोटका (573), जमशेदपुर अंचल (390), गोलमुरी सह जुगसलाई (388), मानगो अंचल (300), और घाटशिला (271) जैसे क्षेत्र शामिल हैं। कई मामलों में एक ही बैंक खाते में चार से पांच लाभुकों की राशि ट्रांसफर की गई है।
जिला प्रशासन ने शुरू की जांच
स्थानीय निवासियों में इस फर्जीवाड़े को लेकर भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यहां के जरूरतमंद  लोगों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा, जबकि फर्जी पतों पर राशि निकाली जा रही है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जिन गांवों में अल्पसंख्यक समुदाय का कोई व्यक्ति नहीं, वहां कैसे इतने बड़े पैमाने पर राशि ट्रांसफर हो रही है। इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। जिला उपायुक्त (डीसी) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं।

कौन चला रहा है रैकेट?
पहले फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और अब मंईयां सम्मान योजना में फर्जीवाड़े ने जिला प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। यह सवाल उठ रहा है कि इस रैकेट के पीछे कौन है और कैसे फर्जी पतों पर राशि ट्रांसफर की जा रही है। जिला प्रशासन ने सभी लाभुकों और आम जनता से अपील की है कि योजना से जुड़ी सही जानकारी साझा करें और किसी भी अनियमितता की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी को फर्जीवाड़े की जानकारी है, तो वह प्रशासन से संपर्क कर सकता है। वैसे इस मामले ने न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि जरूरतमंद लोगों के हक पर सवाल भी खड़े किए हैं।

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