जमशेदपुर अपहरण कांड: उद्यमी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी 96 घंटे से लापता, पुलिस को अंतरराज्यीय गिरोह पर शक
जमशेदपुर अपहरण कांड: उद्यमी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी 96 घंटे से लापता, पुलिस को अंतरराज्यीय गिरोह पर शक
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जमशेदपुर, 17 जनवरी : शहर के प्रमुख उद्योगपति और आदित्यपुर स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (ASIA) के उपाध्यक्ष देवांग गांधी के 24 वर्षीय पुत्र कैरव गांधी के अपहरण मामले ने पूरे औद्योगिक क्षेत्र को हिलाकर रख दिया है। 13 जनवरी को बिष्टुपुर के सर्किट हाउस एरिया से अपनी क्रेटा कार में निकले कैरव गांधी के अब तक कोई सुराग नहीं मिला है, जबकि अपहरणकर्ताओं ने परिवार से 5 करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की है।
घटनाक्रम और पुलिस की खोज
कैरव गांधी मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे घर से निकले थे। वे पहले एसबीआई शाखा में जाने और फिर आदित्यपुर स्थित कंपनी में जाने की बात कहकर गए थे, लेकिन दोपहर 1:45 बजे तक घर नहीं लौटे। परिवार ने बिष्टुपुर पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।रात में सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र के कांदरबेड़ा इलाके में NH-33 के पास एक रिसॉर्ट के नजदीक उनकी लावारिस क्रेटा कार मिली। कार में चाबी लगी हुई थी और पास में उनका मोबाइल फोन भी बरामद हुआ।
फोरेंसिक जांच चल रही है, लेकिन कार में बड़े संघर्ष के निशान नहीं मिले।पुलिस ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की है, जिसमें 7 अलग-अलग टीमें शामिल हैं। जांच झारखंड, बिहार, ओडिशा और अन्य पड़ोसी राज्यों तक फैली हुई है। CCTV फुटेज, टोल प्लाजा रिकॉर्ड, फॉरेंसिक रिपोर्ट और डॉग स्क्वॉड का इस्तेमाल हो रहा है।
फिरौती की मांग और तकनीकी क्लू
अपहरणकर्ताओं ने परिवार को WhatsApp/इंटरनेट कॉल के जरिए संपर्क किया और 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी। कॉल इंडोनेशियाई नंबर (+62-831-94765544) से आई। धमकी दी गई कि 48 घंटे में पैसे नहीं दिए तो कैरव को मार दिया जाएगा। यह डेडलाइन बीत चुकी है, लेकिन कोई नई जानकारी नहीं आई। साइबर सेल इस नंबर की ट्रेसिंग कर रही है। हालांकि परिवार कोई भी रेन्शम काल से इनकार कर रहा है ।
संदिग्ध गिरोह और पुराने कांड से कनेक्शन
पुलिस का मुख्य शक बिहार के कुख्यात अपहरण गिरोहों पर है।
प्रमुख संदिग्ध:
चंदन सोनार (बिहार का ‘किडनैपर किंग’) और उसका नेटवर्क, जो रांची, जहानाबाद और हाजीपुर में सक्रिय है।
छोटू यादव गैंग
प्रिंस खान गिरोह (दुबई से संचालित)
हाजीपुर गैंग
जांच में 2005 के कृष्णा भालोटिया अपहरण कांड से समानता मिली है, जो ठीक उसी कांदरबेड़ा इलाके में हुआ था। तब चंदन सोनार के असोसिएट अरविंद गिरोह शामिल था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अपहरण पेशेवर तरीके से किया गया – अपहरणकर्ताओं ने 5 से अधिक गाड़ियां बदलीं और एक फर्जी पुलिस स्कॉर्पियो (पुलिस स्टिकर वाली) का इस्तेमाल किया। एक 22 मिनट का CCTV गैप भी जांच का टर्निंग पॉइंट बना हुआ है।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ परिवार से मिले और पुलिस को तेज कार्रवाई के निर्देश दिए।
व्यापारी संगठनों (ASIA, सिंहभूम चैंबर) ने चिंता जताई और सुरक्षा बढ़ाने की मांग की।
जदयू नेताओं ने ज्ञापन सौंपा, जबकि विधायक सरयू रॉय ने DGP से बात की।

















