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जमशेदपुर : कैरव गांधी का 5वें दिन भी कोई सुराग नहीं , विधायक सरयू राय ने ट्वीट कर केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच की मांग की ।

जमशेदपुर में हाई-प्रोफाइल अपहरण: उधोगपति देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी का 5वें दिन भी कोई सुराग नहीं , विधायक सरयू राय ने ट्वीट कर केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच की मांग की ।

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जमशेदपुर, 18 जनवरी : शहर के बड़े उधोगपति और देवांग गांधी के 24 वर्षीय पुत्र कैरव गांधी के अपहरण मामले में पांच दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। पुलिस की जांच अब तक हवा में तीर चलाने जैसी ही बनी हुई है, जबकि परिवार और व्यापारिक समुदाय में दहशत का माहौल है।

JDU विधायक सरयू राय ने केंद्रीय गृह मंत्री को टैग कर ट्वीट किया और केंद्रीय एजेंसियों (CBI/NIA) को सक्रिय करने की मांग की। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ फिरौती का नहीं, बल्कि एक युवक की जिंदगी का मामला है।”
इससे पहले केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ परिवार से मिले और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए।जमशेदपुर ईस्ट विधायक पूर्णिमा साहू ने सरकार पर निशाना साधा और बढ़ते अपराध पर चिंता जताई।
व्यापारिक संगठनों ने प्रार्थना सभाएं आयोजित कीं और कैरव की सुरक्षित वापसी की कामना की।

घटना का विवरण

13 जनवरी  को दोपहर करीब 11:30 बजे कैरव गांधी अपने घर (बिष्टुपुर सीएच एरिया) से क्रेटा कार से निकले थे। वे पहले एसबीआई शाखा जाने और फिर आदित्यपुर स्थित कंपनी पहुंचने का प्लान बना रहे थे। लेकिन दोपहर 1:45 बजे तक घर नहीं लौटे। परिवार ने बिष्टुपुर पुलिस में लापता शिकायत दर्ज कराई।

रात करीब 8 बजे एनएच-33 पर चंदिल के कांदरबेड़ा इलाके में एक रिसॉर्ट के पास उनकी कार छोड़ी हुई मिली। कार में चाबी लगी हुई थी, मोबाइल फोन जमीन पर पड़ा था और कई व्यक्तिगत सामान भी मौजूद थे। कार में कोई संघर्ष के निशान नहीं मिले।

फिरौती की मांग और तकनीकी जांच

अपहरण के कुछ घंटों बाद परिवार को इंडोनेशिया के एक व्हाट्सएप नंबर (+62-831-94765544) से कॉल आई, जिसमें कैरव की सुरक्षित रिहाई के बदले 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई। अपहरणकर्ताओं ने धमकी दी कि समय पर रकम नहीं मिली तो कैरव की हत्या कर दी जाएगी।पुलिस ने इस नंबर के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया है।

साइबर सेल नंबर की ट्रेसिंग और इंटरनेट कॉलिंग के स्रोत की जांच कर रही है।

जांच की प्रमुख अपडेट्स

SIT गठित: एसपी (सिटी) कुमार शिवाशीष के नेतृत्व में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) बनाई गई है। सात अलग-अलग टीमें विभिन्न एंगल्स पर काम कर रही हैं।
संदिग्ध गिरोह:

जांच में छोटू यादव गैंग (भागलपुर आधारित), हाजीपुर गैंग और प्रिंस खान गिरोह पर सबसे ज्यादा शक है। ये गिरोह पहले भी फिरौती और अपहरण के मामलों में शामिल रहे हैं।
फर्जी पुलिस वाहन: अपहरण में फर्जी पुलिस स्टिकर वाली स्कॉर्पियो का इस्तेमाल हुआ। सीसीटीवी में पाटा टोल से गुजरते हुए दिखी यह गाड़ी 22 मिनट बाद जोयदा होटल के पास दिखी, लेकिन इसके बाद का ट्रैक गायब है। नंबर प्लेट बाद में कोडरमा की एक बोलेरो से जुड़ी पाई गई।

सीसीटीवी और टोल फुटेज:

टोल प्लाजा, हाईवे और शहर के प्रमुख रास्तों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। फोरेंसिक टीम कार से फिंगरप्रिंट्स और अन्य साक्ष्य जुटा रही है।
छापेमारी: बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड के विभिन्न इलाकों में छापेमारी जारी।

पुलिस का दावा है कि सभी लीड्स पर काम हो रहा है और कैरव की सुरक्षित रिहाई सर्वोच्च प्राथमिकता है। हालांकि, पांचवें दिन भी कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है। पूरा शहर इस हाई-प्रोफाइल मामले का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।

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