जमशेदपुर में हाई-प्रोफाइल अपहरण: उद्योगपति देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी के अपहरण का 8वां दिनअभी , पुलिस के हाथ खाली
जमशेदपुर में हाई-प्रोफाइल अपहरण: उद्योगपति देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी के अपहरण का 8वां दिनअभी , पुलिस के हाथ खाली
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जमशेदपुर, 21 जनवरी – शहर के प्रतिष्ठित उद्यमी और आदित्य एशिया के उपाध्यक्ष देवांग गांधी के 24 वर्षीय पुत्र कैरव गांधी के अपहरण को आठ दिन बीत चुके हैं, लेकिन झारखंड पुलिस को अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है।
खबर है की पुलिस का शक अब अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिंह गिरोह पर है।अजय बिहार के औरंगाबाद जिले के रफीगंज का रहने वाला है। वह गया के डॉक्टर दंपती पंकज गुप्ता और उनकी पत्नी शुभ्रा गुप्ता के अपहरण में गया जेल में सजा काट रहा है।
सूत्रों से जानकारी मिली है कि पुलिस जल्द ही पूछताछ के लिए उसे रिमांड पर लेगी। अजय का गिरोह हाई प्रोफाइल लोगों का अपहरण करता है। इसके लिए वह पुलिस की वर्दी और पुलिस लिखे वाहनों के साथ नीली-लाल बत्ती का भी इस्तेमाल करता है।फिलहाल वह जेल से ही नेटवर्क को चला रहा है।
जिस तरह कैरव का अपहरण किया गया, उसकी मॉडस ऑपरेंडी भी वैसी ही है। अजय सिंह गिरोह ने साल 2015 में गया के डॉ. पंकज गुप्ता और शुभ्रा गुप्ता का एनएच-2 से अपहरण कर लिया था। अजय ने दोनों को वीआईपी काफिले वाली स्टाइल में अगवा किया था। इसके पूर्व उसने रोहतास के एक बड़े ठेकेदार को अगवा किया था। साल 2003 में जयपुर के प्रसिद्ध जौहरी की पत्नी सुमेधा दुर्लभजी के अपहरण में उसे उम्रकैद हुई थी।
साल 2011 में वह पेरोल पर बाहर आया और फिर लापता हो गया था।अजय सिंह गिरोह अपहरण के बाद नशीले इंजेक्शन का उपयोग करता है, ताकि पीड़ित को पता न चले कि उसे कहां ले जाया जा रहा है। वहीं, वह फिरौती के लिए पांच से बीस करोड़ तक की मांग करता है।
अपहरण के आठ से दस दिन के बाद ही फिरौती मांगता है। उसका नेटवर्क बंगाल, यूपी, राजस्थान और गुजरात तक फैला है।गढ़वा के रास्ते औरंगाबाद , यूपी ले जाने की आशंका।
गढ़वा ,पलामू ,सोनभद्र, औरंगाबाद चार राज्यों का सीमावर्ती क्षेत्र है। पुलिस लिखी जिस स्कॉर्पियो की तलाश की जा रही है, वह आखिरी बार बुंडू टोल प्लाजा में दिखी थी। इसके बाद उसे ट्रेस नहीं किया जा सका है।
पुलिस अब यह कयास लगा रही है कि संभवत: कार लोहरदगा और गढ़वा के रास्ते औरंगाबाद , यूपी गई हो। पुलिस अब इस रास्ते में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है।
अपहरण की घटना
13 जनवरी को दिनदहाड़े हुई, जिसने पूरे टाटानगर में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।अपहरण की घटनाकैरव गांधी को बिष्टुपुर सीएच एरिया (एसएसपी आवास के निकट) से उनके घर से महज 100 मीटर की दूरी पर अपहरण कर लिया गया था। अपहरणकर्ता पुलिस की वर्दी में थे और उन्होंने नीली-लाल बत्ती लगी सफेद स्कॉर्पियो (पुलिस लिखी) का इस्तेमाल किया। यह पूरी घटना फिल्मी स्टाइल में अंजाम दी गई। कैरव की कार बाद में कांदरबेड़ा (सेराइकेला-खरसावां जिले में NH-33 के पास) लावारिस हालत में मिली थी।
अपहरण के तुरंत बाद परिवार को फिरौती की मांग शुरू हो गई। शुरुआत में 5 करोड़ रुपये की मांग की गई, जो बाद में बढ़कर 10 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। फिरौती के कॉल्स इंडोनेशियाई नंबर (+62 से शुरू) और WhatsApp के जरिए आए। अपहरणकर्ताओं ने धमकी दी कि समय पर रकम न देने पर कैरव की जान को खतरा है।पुलिस जांच की स्थितिझारखंड पुलिस ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की है, जिसमें जमशेदपुर और सेराइकेला-खरसावां पुलिस शामिल हैं। जांच में CID और एटीएस की टीमें भी जुड़ गई हैं। पुलिस ने 100 से अधिक अधिकारियों की टीमें बनाकर बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में छापेमारी की है।संदिग्ध वाहन बुंडू टोल प्लाजा के बाद ट्रेस नहीं हो सका। पुलिस लोहरदगा-गढ़वा-पलामू-सोनभद्र-औरंगाबाद रूट के CCTV फुटेज जांच रही है, क्योंकि यह चार राज्यों की सीमा क्षेत्र है।
वाहन का मालिक राजशेखर बिहार के नालंदा जिले का बताया जा रहा है, जो साइबर अपराध का गढ़ माना जाता है।
पुलिस ने तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया है और 50 से अधिक लोगों से पूछताछ की है।
घटना ने शहर के उद्योगपति में खौफ पैदा कर दिया है। केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने परिवार से मुलाकात की और ‘जंगल राज’ का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा। जदयू विधायक ने गृह मंत्री अमित शाह से केंद्रीय एजेंसियों की मदद मांगी। व्यापारिक संगठनों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
पुलिस का दावा है कि अपहरणकर्ताओं के करीब पहुंच चुके हैं और कैरव की सुरक्षित वापसी जल्द संभव है। हालांकि, आठ दिन बीत जाने के बावजूद कोई ब्रेकथ्रू नहीं हुआ है। परिवार और शहरवासी कैरव की सलामती की कामना कर रहे हैं।

















