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पेसा कानून की मंजूरी पर जेएमएम का जोरदार स्वागत: सुप्रियो भट्टाचार्य ने भाजपा पर साधा निशाना, इसे आदिवासी समाज की जीत बताया

रांची : झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने रांची स्थित पार्टी के केंद्रीय कैंप कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र की भाजपा सरकार और राज्य भाजपा नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार द्वारा पेसा कानून की नियमावली को कैबिनेट मंजूरी देने को ऐतिहासिक कदम करार दिया।

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भट्टाचार्य ने कहा कि प्रभु यीशु के जन्म से ठीक 24 घंटे पहले राज्य सरकार ने यह ऐतिहासिक फैसला लिया है। उन्होंने पेसा को केवल एक कानून नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की जीवनशैली, संस्कृति और लोकतांत्रिक आत्मा बताया। उन्होंने आगे कहा, “पेसा केवल कानून नहीं है… यह धरती की वंदना है, जल की वंदना है और मातृशक्ति की वंदना है। मानव इतिहास की पहली लोकतांत्रिक नींव आदिवासी समाज ने रखी थी, जहां समुदाय, प्रकृति और सहभागिता को सर्वोच्च स्थान दिया गया।”

जेएमएम महासचिव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि आज जब भाजपा संख्या बल के आधार पर लोकतांत्रिक मूल्यों को खत्म कर रही है, पेसा कानून उसका सबसे मजबूत जवाब है। उन्होंने 1996 में बने पेसा कानून को वर्षों तक जानबूझकर लागू न करने का आरोप लगाया। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और रघुवर दास पर सवाल उठाते हुए कहा, “मैं पूछना चाहता हूं कि जब आप मुख्यमंत्री थे, तब पेसा क्यों नहीं लागू हुआ? अर्जुन मुंडा जनजातीय क्षेत्र से सांसद और मुख्यमंत्री रहे, फिर भी पेसा लागू नहीं हुआ। रघुवर दास की पांच साल की सरकार में भी आदिवासी अस्तित्व पर हमला ही हुआ। लेकिन हेमंत सोरेन की सरकार ने एक साल में यह कर दिखाया।”

भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसने आदिवासी इलाकों में जमीन अधिग्रहण से ग्रामसभा की अनिवार्यता हटाकर आदिवासी समाज को जड़ से खत्म करने की कोशिश की। वहीं, हेमंत सरकार ने ग्रामसभा को लोकतंत्र का मूल केंद्र मानते हुए उसे वैधानिक अधिकार दिए हैं।

उन्होंने कहा, “अब झारखंड में गांव की इजाजत के बिना कुछ नहीं होगा। ग्रामसभा तय करेगी कि शिक्षा कैसी होगी, रोजगार कैसे होंगे और विकास का रास्ता क्या होगा। हमने समाज को ताकत दी है, और अब विकास समाज खुद तय करेगा।”

गौरतलब है कि हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में झारखंड पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियमावली-2025 को मंजूरी दी गई, जिससे राज्य में पेसा अधिनियम 1996 के प्रभावी क्रियान्वयन का रास्ता साफ हो गया है। यह नियमावली अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को व्यापक अधिकार प्रदान करेगी।

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