Khunti : गैस के लिए रातभर लाइन में मच्छरदानी लगाकर सोए मिले लोग, दुखद पहलू
Khunti : गैस के लिए रातभर लाइन में मच्छरदानी लगाकर सोए मिले लोग, दुखद पहलू
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अनिल साहू / रिक्की राज
खूंटी – झारखंड के खूंटी जिले से एलपीजी संकट की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां अनिगड़ा स्थित बिरसा गैस एजेंसी के गोदाम के बाहर उपभोक्ता सिलेंडर की कतार लगाकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। हालात इतने खराब हो गए कि कुछ लोगों को मच्छरदानी लगाकर सड़क किनारे ही रात बितानी पड़ी। इसके बावजूद कई लोगों को सिलेंडर नहीं मिल सका।
दरअसल, रामनवमी के बाद कई दिनों तक गैस की सप्लाई बाधित रही। इसी कारण गुरुवार को वितरण की उम्मीद में लोग बुधवार रात से ही गोदाम के बाहर जमा हो गए। एक महिला उपभोक्ता तो आधी रात में ही पहुंच गई और मच्छरदानी लगाकर वहीं सो गई, ताकि सुबह जब गाड़ी आए तो सिलेंडर मिल जाए। धीरे-धीरे अन्य लोग भी उसी तरह रात बिताने लगे। खूंटी की एसडीएम ने स्वीकार किया कि रात में लोग कतार लगाकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।
गुरुवार को दिन में प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और टोकन वितरण की व्यवस्था की गई। हालांकि, सिलेंडर की संख्या कम होने के कारण आधे से ज्यादा उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ा। बिरसा गैस एजेंसी के संचालक बिरसा मुंडा से संपर्क नहीं हो सका, क्योंकि उनका मोबाइल बंद पाया गया। वहीं भारत गैस एजेंसी के संचालक सुरेश प्रसाद ने बताया कि उनकी एजेंसी पर सप्लाई के अनुरूप ग्राहकों को गैस सिलेंडर दिया जा रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि भीड़ जरूर है, लेकिन उपभोक्ताओं को ज्यादा परेशानी नहीं हो रही है।
इस मामले पर खूंटी की एसडीएम दीपेश कुमारी ने कहा कि गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतार लगी हुई थी और कुछ लोग रात में ही मच्छरदानी लगाकर सो गए थे। सूचना मिलते ही प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और सुबह आपूर्ति को सुनिश्चित कराया गया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन लगातार एलपीजी वितरकों के संपर्क में है और जैसे ही गैस की खेप पहुंचती है, वितरण शुरू करा दिया जाता है। एसडीएम ने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं की संख्या अधिक होने के कारण लोगों में आशंका बनी रहती है कि कहीं खाली हाथ ना लौटना पड़े। इसी वजह से वे पहले से लाइन में लग जाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि घबराएं नहीं, सप्लाई के अनुसार सभी को सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि, आम उपभोक्ताओं का आरोप है कि गैस एजेंसियों द्वारा सही तरीके से वितरण नहीं किए जाने के कारण उन्हें इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में प्रशासन के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
















