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खनन लीज (mining lease) मामले में हर तकनीकी पहलुओं को देखने की जरूरत : रिटायर्ड जस्टिस अशोक कुमार गांगुली

झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ऊपर खदान लीज  (mining lease) का मामला अब और  तूल  पकड़ता जा रहा है। झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन को अब तक का सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री  बताया है। इधर इस मामले को लेकर झारखण्ड के राज्यपाल देश के प्रधानमंत्री और देश के गृह मंत्री से भी मिले है ऐसे में  यह बात उठ  रहा है की आखिर CM  पर जो आरोप लग रहे है उसमे कितनी सच्चाई है और क्या ये इतना बड़ा अपराध है की उनकी कुर्सी भी जा सकती है।   इस बीच एक निजी टीवी चैनल में दिये इंटरव्यू में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस अशोक कुमार गांगुली ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि खनन लीज मामले में हर तकनीकी पहलुओं को देखने की जरूरत है. रिटायर्ड जस्टिस ने कहा है कि ऐसे मामलों में सरकार या कोई भी बर्खास्त नहीं हो सकता. इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के तीन जजमेंट का हवाला दिया है.

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उन्होंने कहा कि सामान्य बातों में समझें तो धारा 9 A  के तहत सभी तरह के मामलों में किसी भी व्यक्ति को उसके पद से बर्खास्त नहीं किया जा सकता. केवल सप्लाई ऑफ गुड्स और सरकारी कामों का उपयोग करने में ही ऐसा किया जा सकता है. माइंस लीज का मामला इसमें नहीं आता. पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पहले ही अपने चुनावी हलाफनामा में इस बात का जिक्र किया है कि उनके नाम से एक माइंस लीज पर है, जिसे उन्होंने रिन्यूअल के लिए भेजी हुई है. ऐसे में तो कोई आपराधिक मामला बनता ही नहीं.  
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