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प्रयागराज POCSO कोर्ट का बड़ा आदेश: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ यौन शोषण के आरोप में दर्ज होगी FIR, जांच के निर्देश

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ गंभीर यौन शोषण के आरोपों में एडीजे (रेप एवं POCSO स्पेशल कोर्ट) ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने झूंसी थाना पुलिस को दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और विधिवत जांच करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

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एडीजे (POCSO एक्ट) विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की ओर से दाखिल अर्जी पर यह आदेश जारी किया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के आश्रम (विद्या मठ) में नाबालिग बच्चों (बटुकों) का यौन शोषण किया गया। मामले में दो नाबालिगों के बयान अदालत में वीडियोग्राफी के साथ दर्ज किए गए थे, जिनके आधार पर कोर्ट ने पुलिस को तुरंत कार्रवाई का आदेश दिया।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं (जैसे 69, 74, 75, 76, 79, 109) और POCSO एक्ट की धारा 3/5/9/17 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। झूंसी थाने में अब एफआईआर दर्ज होने के बाद आगे की जांच शुरू होगी।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इन आरोपों को पूरी तरह फर्जी और साजिशपूर्ण करार दिया है। उन्होंने कहा कि आरोप लगाने वाले व्यक्ति खुद हिस्ट्रीशीटर हैं और यह सब झूठा प्रचार है। स्वामी ने न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा जताते हुए त्वरित जांच की मांग की है और कहा है कि जांच से सच्चाई सामने आएगी।

यह फैसला धार्मिक जगत में हलचल मचा सकता है, क्योंकि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिष पीठ के प्रमुख शंकराचार्य हैं। याचिकाकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि “अब न्याय मिलेगा”।

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