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रघुबर दास का झारखंड सरकार पर हमला: पेसा कानून लागू न होने और अवैध बालू खनन पर उठाए सवाल, पंचायत चुनाव की मांग

रघुबर दास का झारखंड सरकार पर हमला: पेसा कानून लागू न होने और अवैध बालू खनन पर उठाए सवाल, पंचायत चुनाव की मांग

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रांची, 10 सितंबर : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता रघुबर दास ने हेमंत सोरेन सरकार पर पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 (पेसा) को लागू न करने और अवैध बालू खनन को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया है। दास ने कहा कि पेसा कानून लागू न होने से आदिवासी समुदाय के अधिकारों का हनन हो रहा है और राज्य को हजारों करोड़ रुपये की राजस्व हानि उठानी पड़ रही है।

पेसा कानून लागू करने में देरी

रघुबर दास ने कहा कि पेसा कानून की नियमावली का मसौदा 2019 में तैयार होकर विभागों को भेजा गया था, जिसे 2023 में फिर से भेजा गया और 2024 में विधि विभाग को मंतव्य के लिए भेजा गया। इसके बावजूद, हेमंत सरकार इस मामले को लटकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर इस कानून को लागू नहीं कर रही, ताकि अवैध बालू खनन का धंधा चलता रहे।

पेसा कानून लागू होने से अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को लघु खनिजों जैसे बालू, महुआ और मछली के कारोबार पर नियंत्रण मिलेगा, जिससे आदिवासियों को आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण प्राप्त होगा। दास ने कहा, “पेसा लागू होने से सुदूर जिलों में लघु खनिजों का प्रबंधन पंचायतों के हाथों में होगा, लेकिन सरकार इसे रोक रही है।”

उन्होंने कहा की पेशा कानून लागू नही होने से एक विशेष धर्म को फायदा हो रहा है ।

अवैध बालू खनन और राजस्व हानि

दास ने दावा किया कि अवैध बालू खनन के कारण झारखंड को प्रतिवर्ष 2,000 से 3,000 करोड़ रुपये की राजस्व हानि हो रही है, जो कथित तौर पर बालू सिंडिकेट के पास जा रही है। उन्होंने कहा कि झारखंड हाईकोर्ट ने लघु खनिजों और बालू घाटों की नीलामी पर रोक लगाई है, फिर भी सरकार ने बिना ग्राम सभाओं की सहमति के नीलामी की कोशिश की, जिससे साफ है कि वह अपने करीबी सिंडिकेट को फायदा पहुंचाना चाहती है। उन्होंने सरकार से CBI जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने कहा की कि इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि हजारों करोड़ रुपये का राजस्व कहां जा रहा है। दास ने कहा, “यह पैसा जनता का है, आदिवासियों का है, लेकिन इसे लूटा जा रहा है।”

पंचायत चुनाव में देरी और केंद्र का फंड लैप्स

रघुबर दास ने हेमंत सरकार पर स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव न कराने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने कई बार सरकार को चुनाव कराने का निर्देश दिया, लेकिन सरकार इस दिशा में कोई रुचि नहीं दिखा रही। इसके कारण केंद्र सरकार से मिलने वाली 1,400 से 1,700 करोड़ रुपये की अनुदान राशि लैप्स होने का खतरा है।

उन्होंने कहा, “पंचायत चुनाव न होने से ग्राम सभाएं कमजोर हो रही हैं और आदिवासियों का शासन खत्म हो रहा है। पेसा कानून लागू होने से गांवों का शासन मजबूत होगा और विकास होगा, लेकिन सरकार यह नहीं चाहती।”

राहुल गांधी पर सवाल

दास ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए पूछा, “आप झारखंड में पांचवीं अनुसूची के तहत पेसा कानून लागू करने में क्यों रुचि नहीं दिखा रहे? आदिवासियों के अधिकारों की बात करने वाली कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप क्यों है?” उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों से न केवल आदिवासियों का नुकसान हो रहा है, बल्कि पिछड़ी जातियों को भी ट्रिपल टेस्ट के तहत आरक्षण नहीं मिल पा रहा, जिससे शहरों और गांवों का विकास रुका हुआ है।

आदिवासी आंदोलन और मांग

रघुबर दास ने ऐलान किया कि पेसा कानून लागू करने और पंचायत चुनाव कराने की मांग को लेकर आदिवासी समाज दुमका से रांची तक सड़कों पर उतरेगा। उन्होंने सरकार से तत्काल पंचायत चुनाव कराने और पेसा नियमावली को लागू करने की मांग की।

दास ने चेतावनी दी, “यदि सरकार जल्द कदम नहीं उठाती, तो आदिवासी समुदाय अपने अधिकारों के लिए और बड़ा आंदोलन करेगा। यह जनता का हक है, और इसे कोई छीन नहीं सकता।”

जाहिर है रघुबर दास के इन बयानों ने झारखंड की सियासत को गरमा दिया है। पेसा कानून, अवैध बालू खनन, और पंचायत चुनाव जैसे मुद्दों पर सरकार की चुप्पी और देरी ने आदिवासी समुदाय में असंतोष को बढ़ा दिया है। अब यह देखना होगा कि हेमंत सोरेन सरकार इन मांगों पर क्या जवाब देती है और हाईकोर्ट के आदेशों का पालन कैसे सुनिश्चित करती है।

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