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नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा, जानें स्वरूप, महत्व, मंत्र और भोग

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नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत उग्र और शक्तिशाली है, लेकिन वे अपने भक्तों के लिए कल्याणकारी मानी जाती हैं। इसी कारण उन्हें ‘शुभंकरी’ कहा जाता है। मां कालरात्रि की आराधना को भय पर विजय, साहस और नकारात्मकता से मुक्ति की कामना का प्रतीक माना जाता है।

कैसा है मां कालरात्रि का स्वरूप?

धार्मिक ग्रंथों में मां कालरात्रि का वर्णन गहरे काले वर्ण, खुले बाल और तीन नेत्रों वाली देवी के रूप में मिलता है। उनकी चार भुजाएं हैं। दाहिने हाथों में अभय और वरमुद्रा तथा बाएं हाथों में खड्ग और लौह अस्त्र धारण करने का वर्णन मिलता है। मां का वाहन गर्दभ यानी गधा है। उनका उग्र स्वरूप दुष्ट शक्तियों के विनाश और धर्म की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।

क्यों कहलाती हैं शुभंकरी?

मां कालरात्रि का रूप भले ही भय उत्पन्न करने वाला माना जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में वे अपने भक्तों का कल्याण करने वाली देवी हैं। इसी वजह से उनका एक नाम शुभंकरी प्रचलित है। भक्त मां की पूजा कर परिवार की सुख-शांति, सुरक्षा और समृद्धि की कामना करते हैं। उनकी आराधना का संदेश कठिन परिस्थितियों में साहस बनाए रखने और बुराई के विरुद्ध खड़े होने से भी जुड़ा है।

Durga puja
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ऐसे करें मां कालरात्रि की पूजा

नवरात्रि के सातवें दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल की सफाई के बाद मां कालरात्रि की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। मां को पुष्प, अक्षत, धूप और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक मंत्र जाप कर मां की आरती करें। पूजा के दौरान परिवार की सुख-शांति और कल्याण की कामना की जाती है। भक्त अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार दुर्गा सप्तशती या देवी स्तुति का पाठ भी कर सकते हैं। मां कालरात्रि की पूजा में **‘ॐ देवी कालरात्र्यै नमः’** मंत्र का जाप प्रचलित है। मंत्र का जाप शांत मन और श्रद्धा के साथ किया जाता है।

मां कालरात्रि को क्या चढ़ाएं भोग?

धार्मिक परंपरा के अनुसार, मां कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग अर्पित किया जाता है। भक्त फल और अन्य सात्विक प्रसाद भी चढ़ा सकते हैं। कुछ परंपराओं में गुड़ का दान करने की मान्यता भी है। भोग अर्पित करने के बाद प्रसाद श्रद्धापूर्वक ग्रहण किया जाता है।

मां कालरात्रि की पूजा का मूल भाव शक्ति, साहस और कल्याण की कामना है। नवरात्रि के इस दिन भक्त मां से जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति और परिवार में सुख-शांति बनाए रखने का आशीर्वाद मांगते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों के लिए शुभ फल देने वाली देवी हैं।

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