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दिशोम गुरु’ के सम्मान में नतमस्तक राष्ट्र: आज शिबू सोरेन को मरणोपरांत मिलेगा पद्म भूषण

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डेस्क : झारखंड की राजनीति और आदिवासी जन-आंदोलनों के पर्याय, ‘दिशोम गुरु’ स्वर्गीय शिबू सोरेन का नाम आज एक बार फिर इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक गणतंत्र मंडप में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह के पहले चरण में उन्हें मरणोपरांत देश के बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से अलंकृत किया जाएगा।

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संघर्ष की विरासत को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान

शिबू सोरेन का नाम केवल एक पूर्व मुख्यमंत्री तक सीमित नहीं है; वे झारखंड के स्वाभिमान और जल-जंगल-जमीन की लड़ाई के सबसे सशक्त प्रतीक रहे हैं। आज जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगी, तो यह केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उन करोड़ों लोगों के संघर्ष की जीत होगी जिन्होंने ‘दिशोम गुरु’ के नेतृत्व में अपनी पहचान की लड़ाई लड़ी थी।

गणतंत्र मंडप में आज का मुख्य आकर्षण

आज के समारोह में आकर्षण का केंद्र शिबू सोरेन का व्यक्तित्व ही है। पद्म भूषण से उनका सम्मान किया जाना इस बात का प्रमाण है कि भले ही उन्होंने सत्ता के शीर्ष पर कार्य किया हो, लेकिन उनका मूल आधार हमेशा हाशिए पर खड़ा समाज रहा।

ऐतिहासिक क्षण: गणतंत्र मंडप में जब शिबू सोरेन के नाम की घोषणा होगी, तो यह सम्मान अब उनके परिवार को सौंपा जाएगा।

झारखंड का मान: यह क्षण पूरे झारखंड राज्य के लिए गर्व की पराकाष्ठा है, क्योंकि राज्य के सबसे कद्दावर नेता को देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिल रहा है।

क्यों खास है यह उपलब्धि?

पद्म भूषण के लिए उनका चयन उनके द्वारा वर्षों तक चलाए गए उस सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन को मान्यता देता है, जिसने झारखंड को एक अलग राज्य के रूप में पहचान दिलाई। यह पुरस्कार उनकी उस लंबी राजनीतिक यात्रा का एक गरिमामयी समापन है, जो पूरी तरह से जनसेवा के प्रति समर्पित रही।

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