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संसद का विशेष सत्र इसी महीने के अंत में संभव, परिसीमन और महिला आरक्षण पर सरकार की नजर

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नई दिल्ली: संसद का विशेष सत्र अक्टूबर के आखिरी दिनों में बुलाए जाने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इस सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है। सरकार को उम्मीद है कि इस बार लोकसभा में जरूरी समर्थन हासिल कर विधेयकों को पारित कराया जा सकता है। इसके लिए विपक्ष के कुछ दलों से भी बातचीत की जा रही है।

सरकार की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष का विरोध जारी है। दूसरी ओर, सरकार प्रस्तावित विधेयकों के समर्थन में संख्या मजबूत करने के लिए डीएमके और कुछ छोटे विपक्षी दलों के संपर्क में है।

परिसीमन और लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को लेकर सरकार पहले भी संसद में प्रयास कर चुकी है। बजट सत्र के दौरान 17 अप्रैल को लोकसभा में यह विधेयक आवश्यक समर्थन नहीं मिलने के कारण पारित नहीं हो सका था। अब सरकार इसी मुद्दे पर दोबारा पहल करने की तैयारी में है।

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सूत्रों के अनुसार, इस बार सरकार अपनी रणनीति के तहत विपक्षी दलों से बातचीत कर रही है, ताकि मतदान के समय समर्थन की कमी न हो। हालांकि, विधेयकों को लेकर विभिन्न दलों का रुख और अंतिम राजनीतिक समीकरण विशेष सत्र की दिशा तय करने में अहम होंगे।

सरकार की बातचीत में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) भी शामिल है। सूत्रों के मुताबिक, डीएमके के अलावा कुछ छोटे विपक्षी दलों से भी समर्थन जुटाने की कोशिश की जा रही है। सरकार का जोर लोकसभा में विधेयकों के पक्ष में पर्याप्त संख्या सुनिश्चित करने पर है।

विशेष सत्र की तारीख तय करते समय 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के कार्यक्रम को भी ध्यान में रखा जाएगा। यह आयोजन 26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन में प्रस्तावित है। सूत्रों का कहना है कि विशेष सत्र बुलाने से पहले सांसदों को लगभग एक सप्ताह का नोटिस दिया जा सकता है। फिलहाल सरकार की ओर से सत्र की तारीख और कार्यसूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी बताई जा रही है।

गौरतलब है कि संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हुआ था, लेकिन उसका औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ है। ऐसे में विशेष बैठक बुलाने का विकल्प मौजूद है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार विशेष सत्र को लेकर कब औपचारिक घोषणा करती है और प्रस्तावित विधेयकों पर संसद में क्या रुख सामने आता है।

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