राज्यपाल ने चांडिल में विवेकानंद केंद्र के नवनिर्मित ‘प्रकल्प भवन’ का किया उद्घाटन
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आज सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल में विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी के नवनिर्मित सेवा एवं प्रशिक्षण ‘प्रकल्प भवन’ का विधिवत उद्घाटन किया। इसी अवसर पर विवेकानंद केंद्र के संस्थापक मानस-पुत्र श्री एकनाथजी रानाडे की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित ‘साधना दिवस’ कार्यक्रम में भी उन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह प्रकल्प भवन केवल एक ईंट-गारे की इमारत नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और राष्ट्रधर्म की जीवंत प्रयोगशाला है। उन्होंने इसे चांडिल ही नहीं, समूचे झारखंड-बिहार क्षेत्र में समाज-निर्माण और संस्कार जगरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।
युगपुरुष स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं का स्मरण करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विवेकानंद केंद्र का मूल लक्ष्य आध्यात्म-आधारित मानव-निर्माण है। यह नया भवन युवाओं में चरित्र, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रसेवा की भावना जागृत करने का सशक्त केंद्र बनेगा।
झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, प्रकृति-प्रेम और सामुदायिक सौहार्द की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि इस अनमोल विरासत को आधुनिक शिक्षा और कौशल विकास से जोड़ना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। विवेकानंद केंद्र का चांडिल प्रकल्प इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
स्वामी विवेकानंद के कथन को उद्धृत करते हुए राज्यपाल ने कहा, “शिक्षा वह प्रक्रिया है जो मनुष्य में पहले से निहित पूर्णता को प्रकट करती है।” उन्होंने केंद्र के कार्यकर्ताओं द्वारा ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में किए जा रहे शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कार संबंधी कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि “नर सेवा ही नारायण सेवा” भारतीय संस्कृति का सर्वोच्च आदर्श है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” मंत्र का उल्लेख करते हुए राज्यपाल महोदय ने कहा कि वर्तमान शासन व्यवस्था स्वामी विवेकानंद की राष्ट्र-निर्माण की परिकल्पना का जीवंत स्वरूप है। यह प्रकल्प भवन इसी भावना को और मजबूत करेगा।
अंत में युवाओं से आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहिए, साथ ही आधुनिक ज्ञान, विज्ञान और तकनीक से खुद को समृद्ध कीजिए।” उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में चांडिल का यह प्रकल्प भवन मानव-निर्माण, सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्रीय चेतना का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।

















