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बांग्लादेश में उस्मान हादी की मौत से भड़की हिंसा: ढाका से चटगांव तक प्रदर्शन, मीडिया हाउसों पर हमले

बांग्लादेश में उस्मान हादी की मौत से भड़की हिंसा: ढाका से चटगांव तक प्रदर्शन, मीडिया हाउसों पर हमले

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ढाका, 19 दिसंबर : बांग्लादेश में 2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरे और इंक़िलाब मंच के संयोजक शरीफ़ उस्मान हादी की मौत ने देश को एक बार फिर हिंसा की आग में झोंक दिया है। 12 दिसंबर को ढाका में मस्जिद से निकलते समय मोटरसाइकिल सवार नकाबपोश हमलावरों ने उन पर गोली चलाई थी, जिसके बाद उन्हें पहले ढाका और फिर सिंगापुर ले जाया गया। 18 दिसंबर को सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई

इस खबर के फैलते ही देशभर में हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए, जिससे ढाका, चटगांव और अन्य शहरों में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी ।

उस्मान हादी कौन थे?

शरीफ़ उस्मान हादी (जिन्हें उस्मान हादी के नाम से भी जाना जाता है) बांग्लादेश के युवा नेता थे, जिन्होंने जुलाई 2024 के छात्र विद्रोह में अहम भूमिका निभाई थी। इस आंदोलन ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की सरकार को उखाड़ फेंका था।

हादी इंक़िलाब मंच के प्रवक्ता थे और भारत-विरोधी बयानों के लिए मशहूर थे। उन्होंने ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ का नक्शा पेश किया था, जिसमें भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को शामिल करने की बात कही गई थी।

वे आगामी चुनावों में ढाका-8 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार थे। उनकी मौत को कई लोग राजनीतिक साजिश मान रहे हैं, जिससे प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और भड़क गया है ।

हमले और मौत का क्रम

12 दिसंबर 2025: ढाका के रामपुरा इलाके में मस्जिद से निकलते समय दो नकाबपोश हमलावरों ने हादी पर गोली चलाई। गोली उनके सिर में लगी और वे गंभीर रूप से घायल हो गए ।

इलाज: पहले ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती किया गया, फिर 15 दिसंबर को एयर एम्बुलेंस से सिंगापुर ले जाया गया।

18 दिसंबर 2025: सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के दौरान मौत। सिंगापुर के विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की ।

पुलिस ने दो संदिग्धों की तस्वीरें जारी की हैं और उनके लिए इनाम घोषित किया है । जांच जारी है, लेकिन प्रदर्शनकारी सरकार पर हमलावरों को बचाने का आरोप लगा रहे हैं ।

मौत के बाद भड़की हिंसाहादी की मौत की खबर फैलते ही 18-19 दिसंबर की रात देशभर में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने भारत-विरोधी नारे लगाए और कई जगहों पर तोड़फोड़ की

प्रमुख घटनाएं:

मीडिया हाउसों पर हमले: प्रोथोम आलो और डेली स्टार के दफ्तरों में तोड़फोड़ और आगजनी हुई। प्रोथोम आलो ने बयान जारी कर हमले की निंदा की
। एक वरिष्ठ पत्रकार नुरुल कबीर पर भी हमला हुआ ।

सांस्कृतिक केंद्र पर हमला:

छायानट (Chhayanaut) पर प्रदर्शनकारियों ने घुसकर तोड़फोड़ की और आग लगाई। कुछ ने इसे ‘भारतीय संस्कृति’ का प्रतीक बताकर निशाना बनाया ।

ऐतिहासिक स्थलों पर हमला: शेख़ मुजीबुर रहमान का घर (धनमंडी 32) तीसरी बार निशाना बना। इसे बुलडोजर से तोड़ा गया और आग लगाई गई ।

राजनीतिक हमले:

पूर्व मंत्रियों मोहिबुल हसन, बीर बहादुर और अन्य अवामी लीग नेताओं के घरों पर हमले। चटगांव में पूर्व मंत्री का घर जलाया गया ।

अल्पसंख्यकों पर हमले: म्यामेंसिंह में एक हिंदू व्यक्ति दीपू चंद्र दास की ब्लास्फेमी के आरोप में लिंचिंग की खबर ।
कूटनीतिक हमले: चटगांव में भारतीय असिस्टेंट हाई कमिशन पर पत्थरबाजी। कम से कम चार लोग घायल, जिसमें दो पुलिसकर्मी शामिल.

हिंसा में सड़कें ब्लॉक की गईं, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। कई इलाकों में रातभर तनाव रहा, अतिरिक्त पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स तैनात की गई ।

सरकारी और अंतरिम सरकार की प्रतिक्रियाअंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने हादी की मौत को ‘राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति’ बताया और एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया । उन्होंने शांति की अपील की और कहा कि हिंसा से कुछ हासिल नहीं होगा ।

शुक्रवार को मस्जिदों में विशेष प्रार्थना का ऐलान किया गया। हालांकि, विपक्षी गुट सरकार पर हिंसा को प्रोत्साहित करने का आरोप लगा रहे हैं

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और चिंताएंभारत-विरोधी नारों और हमलों से तनाव बढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे लोकतंत्र और प्रेस फ्रीडम पर खतरे के रूप में देखा है।

चुनाव से ठीक पहले यह हिंसा देश की स्थिरता पर सवाल उठा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हिंसा नहीं रुकी तो चुनाव प्रभावित हो सकते हैं ।
बांग्लादेश पहले से ही 2024 के बाद अल्पसंख्यकों पर हमलों से जूझ रहा है, और यह नई हिंसा स्थिति को और जटिल बना रही है

सरकार ने जांच तेज करने का वादा किया है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का गुस्सा कम होने के आसार नहीं दिख रहे। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

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