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वक्फ कानून के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में वक्फ (संशोधन) अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज सुनवाई होगी। यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ द्वारा दोपहर 2 बजे की जाएगी। पहले यह मामला तीन जजों की पीठ को सुनना था, लेकिन अब दो जजों की बेंच सुनवाई करेगी।

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सुप्रीम कोर्ट में 70 से अधिक याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा, समाजवादी पार्टी सांसद जिया-उर-रहमान बर्क, जामियत उलेमा-ए-हिंद, और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे संगठन शामिल हैं।

 

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कानून मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वायत्तता का उल्लंघन करता है और वक्फ संपत्तियों पर मनमाने प्रतिबंध लगाता है। यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 25 (धार्मिक स्वतंत्रता), 26 (धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन का अधिकार), और 300A (संपत्ति का अधिकार) का उल्लंघन करता है। ‘वक्फ बाय यूजर’ की अवधारणा को हटाने और गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने जैसे संशोधनों को भेदभावपूर्ण बताया गया है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह कानून सुप्रीम कोर्ट के ‘वन्स अ वक्फ, ऑलवेज अ वक्फ’ सिद्धांत का उल्लंघन करता है।

 

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट दायर की है, ताकि कोई भी आदेश पारित करने से पहले उनकी बात सुनी जाए। सरकार का कहना है कि यह कानून वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए है। वहीं इस कानून का असम, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, और महाराष्ट्र की सरकारों ने समर्थन किया है, इसे संवैधानिक और संरचनात्मक सुधारों वाला बताया है।

 

वक्फ (संशोधन) बिल, 2025 को लोकसभा और राज्यसभा में तीखी बहस के बाद पारित किया गया था। इसे 5 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिली और 8 अप्रैल से यह लागू हो गया। इस कानून में वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने, वक्फ संपत्तियों की स्थिति तय करने का अधिकार जिला कलेक्टर को देने, और वक्फ ट्रिब्यूनल की संरचना में बदलाव जैसे प्रावधान हैं।

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