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ग्वालियर में मंदिर जा रहे श्रद्धालुओं पर चढ़ा मौत बनकर ट्रक, 15 की मौत; सीएम ने 9 पुलिसकर्मियों पर की कार्रवाई, मृतकों के परिजनों को 4 लाख की सहायता

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शीतला माता मंदिर के पास बैरिकेड तोड़कर ढलान पर बेकाबू हुआ धान से लदा ट्रक, गेट और दीवार से टकराया; चालक-मालिक गिरफ्तार, पीएम मोदी ने भी की मुआवजे की घोषणा

ग्वालियर/भोपाल। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के दर्शन करने जा रहे श्रद्धालुओं के लिए रविवार की सुबह मातम लेकर आई। नवरात्र के दौरान माता के दर्शन के लिए निकले श्रद्धालुओं को धान से लदे एक बेकाबू ट्रक ने कुचल दिया। ट्रक श्रद्धालुओं को रौंदते हुए मंदिर के प्रवेश द्वार और बाहरी दीवार से जा टकराया। इस दर्दनाक हादसे में बाद की कुछ रिपोर्टों के अनुसार 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 26 से 33 तक लोगों के घायल होने की अलग-अलग जानकारियां सामने आई हैं। घायलों में दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आर्थिक सहायता की घोषणा की, घायलों का नि:शुल्क उपचार कराने के निर्देश दिए और ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कार्रवाई की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से सहायता देने का ऐलान किया। ट्रक के चालक और मालिक को गिरफ्तार किए जाने की भी खबर है।

रात करीब 1:30 बजे हुआ हादसा, ढलान पर बेकाबू हुआ ट्रक

यह हादसा शनिवार और रविवार की दरमियानी रात करीब 1:30 बजे चीनौर रोड पर शीतला माता मंदिर के पास हुआ। नवरात्र के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंच रही थी। इसी वजह से मंदिर की ओर जाने वाले ढलान वाले मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित था। पुलिस और प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, पंजाब नंबर का धान से लदा ट्रक चीनौर की ओर से मंदिर की तरफ आ रहा था। रास्ते में ट्रक अनियंत्रित हो गया और बैरिकेड पार करते हुए ढलान पर तेजी से नीचे की ओर बढ़ने लगा। रास्ते में पैदल जा रहे श्रद्धालु और सड़क किनारे मौजूद लोग इसकी चपेट में आ गए। इसके बाद ट्रक मंदिर के प्रवेश द्वार और बाहरी दीवार से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दीवार का एक हिस्सा ढह गया और कई लोग मलबे तथा ट्रक के नीचे दब गए। शुरुआती जानकारी में ट्रक के ब्रेक फेल होने की आशंका जताई गई। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह की आधिकारिक पुष्टि के लिए वाहन की तकनीकी जांच कराई जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि प्रतिबंधित मार्ग पर बैरिकेड और पुलिस चेक-प्वाइंट होने के बावजूद ट्रक वहां तक कैसे पहुंचा।

चीख-पुकार के बीच स्थानीय लोगों ने शुरू किया बचाव कार्य

हादसे के बाद मंदिर मार्ग पर अफरा-तफरी मच गई। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने घायलों को निकालने में मदद की। पुलिस और एंबुलेंस की सहायता से घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचाया गया। कुछ घायलों को गंभीर चोटें और फ्रैक्चर आने की खबर है। ग्वालियर की कलेक्टर रुचिका चौहान के अनुसार, घायलों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया। जयारोग्य अस्पताल समेत अन्य चिकित्सा केंद्रों में उनका उपचार किया गया। प्रशासन ने घायलों की स्थिति के अनुसार जांच और इलाज सुनिश्चित करने की बात कही। मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर दिनभर अलग-अलग रिपोर्टें सामने आईं। शुरुआती खबरों में 12 मौतें और 29 घायल बताए गए, जबकि बाद की कुछ रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 14 से 15 और घायलों की संख्या 26 से 33 तक बताई गई।

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मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 4 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की

हादसे की जानकारी मिलने के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि दुख की इस घड़ी में राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है।
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सहायता की घोषणा की। इसके तहत मृतकों के प्रत्येक परिवार को चार लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को दो लाख रुपये और अन्य घायलों को 50-50 हजार रुपये दिए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को सभी घायलों का नि:शुल्क उपचार सुनिश्चित कराने के निर्देश भी दिए।मुख्यमंत्री ने मंत्री ऐदल सिंह कंसाना और राकेश शुक्ला को ग्वालियर पहुंचकर प्रभावित परिवारों और घायलों की स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए। उन्होंने बाबा महाकाल से दिवंगत आत्माओं को शांति देने और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की।

लापरवाही पर सख्ती: सीएसपी हटाए गए, नौ पुलिसकर्मी निलंबित

हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंधित मार्ग पर भारी वाहन के प्रवेश को लेकर गंभीर सवाल उठे। मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस विभाग में कार्रवाई की गई।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, झांसी रोड के सीएसपी रवि भदौरिया को पद से हटाया गया है। इसके अलावा तीन थाना प्रभारियों समेत नौ पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की कार्रवाई की गई। निलंबित अधिकारियों एवं कर्मचारियों में झांसी रोड थाना प्रभारी शक्ति सिंह यादव, आंतरी थाना प्रभारी गीतेश शर्मा, झांसी रोड के ट्रैफिक थाना प्रभारी अभिषेक रघुवंशी और यातायात निरीक्षक राघवेंद्र जादौन के नाम शामिल हैं। प्रधान आरक्षक सुशील द्विवेदी तथा आरक्षक किशन खन्ना, अनिल जैतपुरिया और पवन सेंगर पर भी कार्रवाई की खबर है।
प्रशासन की जांच का प्रमुख बिंदु यह है कि नवरात्र के दौरान भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक और पुलिस चेक-प्वाइंट होने के बावजूद ट्रक प्रतिबंधित मार्ग पर कैसे पहुंचा। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय की टीम को भी वाहन की तकनीकी जांच के लिए लगाया गया है।

ट्रक चालक और मालिक गिरफ्तार

हादसे के बाद पुलिस ने ट्रक के चालक और मालिक को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस वाहन के तकनीकी पहलुओं, उसके मार्ग और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश की परिस्थितियों की जांच कर रही है। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि हादसा वाहन में तकनीकी खराबी, नियंत्रण खोने या अन्य कारणों से हुआ और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी जताया दुख, केंद्र से मिलेगी सहायता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्वालियर हादसे में हुई जनहानि पर गहरा दुख व्यक्त किया। प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक सूचना के अनुसार, उन्होंने शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से प्रत्येक मृतक के परिजन को दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। वहीं, प्रत्येक घायल को 50 हजार रुपये दिए जाएंगे। इस तरह प्रभावित परिवारों को राज्य और केंद्र सरकार की ओर से अलग-अलग सहायता मिलेगी। राज्य सरकार की घोषित सहायता के साथ प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष की राशि भी नियमानुसार दी जाएगी।

गृह मंत्री के बयान को लेकर आधिकारिक पुष्टि जरूरी

इस हादसे पर गृह मंत्री के नाम से अलग बयान या सोशल मीडिया पोस्ट की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं हो सकी है। इसलिए किसी गृह मंत्री के नाम से अतिरिक्त घोषणा, मुआवजे या कार्रवाई का दावा करना उचित नहीं होगा। पुष्टि होने पर उनका बयान भी खबर में शामिल किया जा सकता है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

नवरात्र जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया था। इसके बावजूद ट्रक का इस मार्ग पर पहुंचना प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर जांच का विषय बन गया है। हादसे के बाद पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है और वाहन की तकनीकी जांच भी शुरू हुई है। अब सबसे अहम सवाल यह है कि प्रतिबंधित मार्ग पर ट्रक को प्रवेश कैसे मिला, बैरिकेड पार करने के बाद उसे क्यों नहीं रोका जा सका और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

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