राजस्थान में 7 डिजिट VIP नंबर घोटाला: 500 करोड़ का अनुमानित नुकसान, वेरिफिकेशन प्रक्रिया जारी
राजस्थान में 7 डिजिट VIP नंबर घोटाला: 500 करोड़ का अनुमानित नुकसान, वेरिफिकेशन प्रक्रिया जारी
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
जयपुर, 26 दिसंबर – राजस्थान परिवहन विभाग में पुरानी 7 डिजिट हैरिटेज वाहन नंबर सीरीज से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आने के बाद विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। अनुमान है कि इस फर्जीवाड़े से सरकार को 500 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व नुकसान हुआ है। जांच में जयपुर आरटीओ प्रथम के 32 अधिकारी-कर्मचारी दोषी पाए गए हैं, जिनमें उच्च स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं।
घोटाले की पूरी कहानी
परिवहन विभाग में पुरानी 7 डिजिट नंबर सीरीज (जैसे पुराने हैरिटेज या VIP नंबर) को फर्जी बैकलॉग एंट्री दिखाकर अवैध रूप से अलॉट किया गया। ये नंबर बहुत कीमती होते हैं और ऑक्शन में लाखों-करोड़ों में बिकते हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से इन नंबर्स को कम कीमत पर या गलत लोगों को दे दिया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।जांच की शुरुआत नवंबर में हुई, जब जयपुर आरटीओ में अनियमितताएं पकड़ी गईं। अब तक प्रदेशभर में करीब 10 हजार संदिग्ध 7 डिजिट नंबर वाले वाहनों की पहचान की गई है।
आसान तरीके से समझिए क्या हुआ:
भारत में गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नंबर आमतौर पर कुछ अक्षर + 4 डिजिट के होते हैं (जैसे RJ14 AB 1234)।
लेकिन कुछ खास “फैंसी” या “VIP” नंबर (जैसे 0001, 0786 आदि) लोगों को बहुत पसंद आते हैं। ये नंबर ऑक्शन में ऊँची कीमत पर बिकते हैं – लाखों या करोड़ों में।
राजस्थान में पुरानी “7 डिजिट” वाली नंबर सीरीज (पुराने हैरिटेज या स्पेशल नंबर) थे, जो बहुत कीमती हैं।
परिवहन विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर फर्जी तरीके से इन नंबर्स की “बैकलॉग एंट्री” की यानी सिस्टम में झूठी पुरानी एंट्री दिखाकर ये महंगे नंबर कम कीमत पर या गलत लोगों को अलॉट कर दिए।
इससे सरकार को ऑक्शन से मिलने वाली करोड़ों की कमाई का नुकसान हुआ, क्योंकि ये नंबर फर्जीवाड़े से सस्ते या अवैध रूप से बिक गए।
अब तक की कार्रवाई
जयपुर आरटीओ प्रथम में बड़ी एक्शन: 2,129 वाहनों की रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) ब्लैकलिस्ट कर दी गई। इन वाहन मालिकों को नोटिस जारी किए गए हैं।
फिजिकल वेरिफिकेशन शुरू:
जगतपुरा स्थित एआरटीओ कार्यालय में 24 से 26 दिसंबर तक संदिग्ध वाहनों की जांच चल रही है। कई मालिक क्रेन से अपने वाहन लेकर पहुंचे। दस्तावेज सही नहीं निकले तो आरसी निलंबित या निरस्त की जाएगी और मुकदमा दर्ज होगा।
थ्री डिजिट VIP नंबर्स पर भी ऑडिट: हाल ही में थ्री डिजिट नंबर्स की भी विशेष जांच शुरू हुई, जिसमें अवैध आवंटन की मिलीभगत सामने आई।
दोषियों पर गाज:
32 कर्मचारियों-अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी। बड़े अफसरों पर FIR होगी। एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) भी मामले की जांच में सक्रिय है।
राज्य स्तर पर निर्देश: सभी आरटीओ को 31 दिसंबर तक जांच पूरी करने के आदेश। फर्जी दस्तावेजों वाले मामलों में FIR अनिवार्य।
परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार रोकने के लिए की जा रही है। VIP नंबर्स की डिमांड बहुत ज्यादा होने से ऐसे घोटाले आम हो रहे थे, लेकिन अब सिस्टम को और सख्त बनाया जा रहा है।यह मामला अभी जांच के दौर में है और आगे और खुलासे हो सकते हैं।

















