Ranchi University :- फर्जी सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन मामले में आरयू ने अब तक 3 कर्मियों पर नहीं की कोई कार्रवाई
Ranchi University
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Drishti Now Ranchi
रांची यूनिवर्सिटी के तीन कर्मचारियों पर फर्जी सर्टिफिकेट मामले संलिप्त होने के आरोप लगे थे। इस मामले की जांच कर रहे सीबीआई ने रांची विवि प्रशासन को पत्र लिखकर कार्रवाई करने के लिए कहा था। लेकिन दो साल बाद भी इस मामले में एक्शन नहीं लिया गया है। इस मामले में पीपीके कॉलेज बुंडू के कर्मचारी विद्या भूषण शुक्ला, घनश्याम महतो और रांची यूनिवर्सिटी मुख्यालय में कार्यरत अब्दुल बारी के नाम शामिल हैं। सोमवार को यह मामला अचानक सतह पर आ गया।
विवि मुख्यालय में खूब चर्चा हो रही थी। सीबीआई द्वारा जारी लेटर वायरल हो रहा था। यह मामला फेक प्रोविजनल सर्टिफिकेट से जुड़ा हुआ है। इस संबंध में पूछे जाने पर अब्दुल बारी ने कहा कि इस मामले में कोर्ट से स्टे लगा हुआ है। इतना ही नहीं, पूर्व वीसी डॉ. एसएस कुशवाहा ने कोर्ट में कहा था कि अब्दुल बारी का इस मामले में किसी प्रकार का दोष नहीं है। जब मामला अदालत में स्टे है, तो इससे संबंधित पत्र को वायरल करने की मंशा स्पष्ट हो जाती है। यह परेशान करने के लिए किया जा रहा है।
कर्मचारियों के दो गुटों में तीखी नोकझोंक
आरयू में सोमवार को कर्मचारियों के दो गुटों के बीच विवि अधिकारियों के समक्ष जमकर नोंक-झोंक हुई। एक गुट का कहना था कि रांची विवि का चुनाव हो चुका है। वहीं दूसरे गुट ने चुनाव कराने के लिए तिथि की घोषणा भी कर दी थी। पर्यवेक्षक नियुक्त करने के लिए विवि प्रशासन को आवेदन भी दिया था। वीसी प्रो. अजीत कुमार सिन्हा ने दो अधिकारियों को पर्यवेक्षक बनाने की स्वीकृति भी दी थी। लेकिन दो दिन बाद पर्यवेक्षक की नियुक्ति से संबंधित नोटिफिकेशन नहीं जारी नहीं होने पर कर्मचारी वीसी के पास जानकारी लेने पहुंचे थे।
वहां दूसरे पक्ष के कर्मचारी भी थे। इनका कहना था कि चुनाव कराने का अधिकार अखिल भारतीय विवि महासंघ को है, जिसके संयोजक नवीन चंचल हैं। इसमें यूनिवर्सिटी प्रशासन पर्यवेक्षक नियुक्त नहीं कर सकता है। इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने लीगल ओपिनियन लेने का निर्णय लिया है। लीगल ओपिनियन आने के बाद अब इस मामले आगे की कार्यवाही होगी।
नहीं हो सका नोमिनेशन
कर्मचारी संघ चुनाव के लिए शिड्यूल की घोषणा पहले ही कर दी गई थी। शिड्यूल के अनुसार छह और सात फरवरी को नोमिनेशन किया जाना था। लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा पर्यवेक्षक नियुक्त नहीं किए जाने के कारण नोमिनेशन नहीं हो सका। इधर, कर्मचारियों का कहना है कि नए सिरे से शिड्यूल जारी किया जाएगा।

















