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झारखंड शराब घोटाला: पूर्व उत्पाद आयुक्त अमित प्रकाश गिरफ्तार, ACB की कार्रवाई तेज

झारखंड शराब घोटाला: पूर्व उत्पाद आयुक्त अमित प्रकाश गिरफ्तार, ACB की कार्रवाई तेज

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रांची, 17 जून : झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले में मंगलवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व उत्पाद आयुक्त अमित प्रकाश को गिरफ्तार किया। दिसंबर 2024 में सेवानिवृत्त हुए प्रकाश पर शराब के थोक व्यापारी ओम साईं को 12 करोड़ रुपये की राशि विमुक्त करने का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद ACB ने उन्हें रांची स्थित अपने मुख्यालय में पूछताछ के लिए ले जाया, जहां गहन जांच जारी है।
छह लोग पहले ही गिरफ्तार
इस मामले में ACB अब तक छह लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिसमें वरिष्ठ IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे और संयुक्त आयुक्त गजेंद्र सिंह शामिल हैं। यह घोटाला कथित तौर पर 2022 की शराब नीति से जुड़ा है, जिसके तहत छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट को फायदा पहुंचाने का आरोप है। इस नीति से राज्य को 38 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने की बात सामने आई है।
कैसे शुरू हुआ घोटाला?
झारखंड में  सन्न 2020 के अंत से ही यह चर्चा शुरू हो गयी थी की  2022-23 के लिए नई शराब नीति लागू होगी, जिसमें छत्तीसगढ़ के शराब माफिया का दबदबा होगा। इसके तहत उत्पाद विभाग ने छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग लिमिटेड (CSML) को राजस्व बढ़ाने के लिए सलाहकार नियुक्त किया। सलाहकार अरुणपति त्रिपाठी की फीस 1.25 करोड़ रुपये तय की गई। नई नीति को राजस्व परिषद के सदस्य अमरेंद्र प्रसाद सिंह के पास मंजूरी के लिए भेजा गया, जिन्होंने नीति पर असहमति जताते हुए कई बदलावों का सुझाव दिया। सिंह ने यह भी टिप्पणी की थी कि CSML अपने राज्य में राजस्व बढ़ाने में नाकाम रही है, फिर भी उसे सलाहकार बनाया गया।
ED की भी जांच
यह मामला केवल ACB तक सीमित नहीं है। अक्टूबर 2024 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड और छत्तीसगढ़ में छापेमारी की थी, जिससे इस घोटाले के अंतरराज्यीय कनेक्शन का खुलासा हुआ। फर्जी बैंक गारंटी और प्लेसमेंट एजेंसियों को भुगतान जैसे गड़बड़ियों की जांच चल रही है। कई व्यापारियों और एजेंसी प्रतिनिधियों को नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन कुछ पूछताछ से बच रहे हैं, जिसके लिए ACB अब गिरफ्तारी वारंट की तैयारी में है।
विपक्ष का CBI जांच का दबाव
विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस घोटाले की CBI जांच की मांग की है। उनका दावा है कि घोटाले की राशि हजारों करोड़ तक हो सकती है और ACB की जांच पर्याप्त नहीं है।

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