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बारिश से तबाही! तेनुघाट डैम के सभी 10 फाटक खुले, पश्चिम बंगाल में बाढ़ का खतरा

राकेश शर्मा

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बोकारो: झारखंड में मॉनसून की दस्तक के साथ ही पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने बोकारो समेत कई जिलों में तबाही मचा दी है। बारिश के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिसके चलते बोकारो स्थित एशिया के सबसे बड़े मिट्टी के बांध, तेनुघाट डैम, में जलस्तर खतरे के निशान को पार कर 857 फीट तक पहुंच गया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए डैम के सभी 10 रेडियल फाटक खोल दिए गए हैं, और दामोदर नदी में 95,810 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।

तेनुघाट डैम से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण दामोदर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। जिला प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और नदी के पास न जाने की सख्त हिदायत दी है। नदी में पानी का बहाव बहुत तेज है, जिससे खतरा बढ़ गया है। बोकारो के डीसी ने लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षित स्थानों पर रहें और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें।

दामोदर नदी के बढ़ते जलस्तर का असर पश्चिम बंगाल के निचले इलाकों में भी देखने को मिल सकता है। बंगाल के बर्धमान, हुगली, बांकुरा और पुरुलिया जैसे जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने का खतरा मंडरा रहा है। पश्चिम बंगाल प्रशासन को पहले ही अलर्ट जारी किया गया है, और नदी किनारे माइकिंग के जरिए लोगों को सतर्क किया जा रहा है।

दामोदर घाटी निगम (DVC) के अधिकारियों के अनुसार, तेनुघाट डैम से पानी की निकासी नियंत्रित तरीके से की जा रही है, लेकिन भारी बारिश के कारण डैम में जल दबाव बढ़ने की स्थिति में और फाटक खोले जा सकते हैं। इससे निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है।

स्थानीय निवासियों और प्रशासन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस तरह की स्थिति पिछले कई वर्षों में कम ही देखी गई है। दामोदर नदी, जिसे कभी “बंगाल का शोक” कहा जाता था, एक बार फिर अपने उग्र रूप में नजर आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और अनियमित बारिश के कारण ऐसी आपदाएं अब और आम हो सकती हैं।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और आपात स्थिति में स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करें। बोकारो और पश्चिम बंगाल के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

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