साहिबगंज में गंगा नदी का रौद्र रूप: 1600 घरों में घुसा पानी, स्कूल दो दिन बंद, बाढ़ से हाहाकार

साहिबगंज में गंगा नदी का रौद्र रूप: 1600 घरों में घुसा पानी, स्कूल दो दिन बंद, बाढ़ से हाहाकार

साहिबगंज में गंगा नदी का रौद्र रूप: 1600 घरों में घुसा पानी, स्कूल दो दिन बंद, बाढ़ से हाहाकार

साहिबगंज, झारखंड में गंगा नदी ने अपने विकराल रूप दिखाते हुए जिले में भारी तबाही मचाई है। गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान 27.25 मीटर से 1.37 मीटर ऊपर, यानी 28.62 मीटर तक पहुंच गया है, जिसके कारण जिले के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस प्राकृतिक आपदा ने लगभग 1600 घरों को प्रभावित किया है, और हजारो लोग इस बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। दियारा क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न हो गया है, जबकि शहरी क्षेत्रों में भी पानी घुसने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

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साहिबगंज में गंगा नदी का रौद्र रूप: 1600 घरों में घुसा पानी, स्कूल दो दिन बंद, बाढ़ से हाहाकार

 बाढ़ का प्रभाव: दियारा से शहरी क्षेत्र तक तबाही

साहिबगंज साहिबगंज में गंगा नदी का रौद्र रूप: 1600 घरों में घुसा पानी, स्कूल दो दिन बंद, बाढ़ से हाहाकार परिषद के 28 वार्डों में से 11 वार्ड इस बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। विशेष रूप से वार्ड नंबर 13 (हबीबपुर) और वार्ड नंबर 22 (चानन गांव) में स्थिति सबसे गंभीर है। इन क्षेत्रों में सैकड़ों घरों में पानी घुस गया है, जिससे लोगों का जीना मुहाल हो गया है। सड़कों, गलियों और घरों में पानी भरने से लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। दियारा क्षेत्र, जो गंगा के किनारे बसा है, पूरी तरह पानी में डूब चुका है। खेत, फसलें और बस्तियां जलमग्न होने से किसानों और स्थानीय निवासियों को भारी नुकसान हुआ है। लोग नाव पर चल रहे है।

साहिबगंज में गंगा नदी का रौद्र रूप: 1600 घरों में घुसा पानी, स्कूल दो दिन बंद, बाढ़ से हाहाकार

 स्कूलों में पढ़ाई ठप, दो दिन की छुट्टी

बाढ़ के कारण कई स्कूलों में पानी घुस गया है, जिससे पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई है। जिला प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 11 और 12 अगस्त 2025 को साहिबगंज जिले के सभी स्कूलों को बंद करने का आदेश जारी किया है। यह निर्णय बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है, क्योंकि कई स्कूल परिसरों में पानी भर गया है, और सड़कों पर जलभराव ने आवागमन को असुरक्षित बना दिया है।

 प्रशासन का राहत और बचाव कार्य

जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए नावों की व्यवस्था की गई है, और राहत शिविरों में भोजन, पीने का पानी, और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इसके अलावा, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए भी चारा वितरण की व्यवस्था की जा रही है ताकि पशुपालकों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। प्रशासन ने लोगों से बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों, नदी के किनारों और घाटों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है।

बाढ़ की वजह और भविष्य की चेतावनी

गंगा नदी में जलस्तर बढ़ने का कारण हाल के दिनों में हुई भारी बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से आ रहा पानी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलस्तर में और वृद्धि की आशंका बनी हुई है, जिसके चलते स्थिति और गंभीर हो सकती है। प्रशासन ने नदी के किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

इस बाढ़ ने न केवल लोगों के घरों और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि उनकी आजीविका पर भी गहरा असर डाला है। किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं, और छोटे-मोटे व्यवसाय ठप पड़ गए हैं। बाढ़ के कारण सड़क और यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई है, जिससे आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में बाधा आ रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बाढ़ का ऐसा प्रकोप उन्होंने हाल के वर्षों में कम ही देखा है।

प्रशासन और समुदाय की एकजुटता

जिला प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय समुदाय भी राहत कार्यों में जुटा है। स्वयंसेवी संगठन और स्थानीय लोग प्रभावित परिवारों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। उपायुक्त ने आश्वासन दिया है कि स्थिति पर काबू पाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं, और केंद्र व राज्य सरकार से अतिरिक्त सहायता मांगी गई है।

जाहिर है साहिबगंज में गंगा नदी की बाढ़ ने जिले को गहरे संकट में डाल दिया है। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और राहत कार्यों से कुछ हद तक स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन जलस्तर में और वृद्धि की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें और सुरक्षित स्थानों पर रहें।

 

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