जमशेदपुर डोबो पूल बना दहशत का केंद, बिते सात दिनों में चार लोगों ने पुल से लगाई छलांग , जिला प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
जमशेदपुर डोबो पूल बना दहशत का केंद, बिते सात दिनों में चार लोगों ने पुल से लगाई छलांग , जिला प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
जमशेदपुर के सोनारी क्षेत्र में दो नदियों के संगम पर स्थित डोबो पूल, जो कभी अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता था, अब आत्महत्या के मामलों के कारण चर्चा में है। पिछले सात दिनों में इस पूल से चार लोगों ने छलांग लगाकर अपनी जान देने की कोशिश की, जिसमें दो युवतियां भी शामिल हैं। इनमें से एक युवती को पुलिस और मछुआरों की तत्परता से बचा लिया गया, लेकिन अन्य तीन की मौत ने शहर में दहशत फैला दी है। स्थानीय लोग इसे रोकने के लिए पूल के दोनों ओर जाली लगाने की मांग कर रहे हैं।
हाल की घटनाएं:
29 जुलाई : नीरज मुखी ने डोबो पूल से कूदकर आत्महत्या की।
1 जुलाई : ऑटो चालक विकास शर्मा ने पूल से छलांग लगाकर अपनी जान दी।
2 अगस्त : भुइयांडीह की सुमित्रा प्रमाणिक ने प्रेमी से फोन पर झगड़े के बाद आत्महत्या कर ली।[]
5 अगस्त : साकची की 18 वर्षीय पूर्णिमा ने आत्महत्या का प्रयास किया, लेकिन पुलिस और मछुआरों ने उसे बचा लिया। वह गंभीर हालत में ब्रह्मानंद अस्पताल में भर्ती है।
क्यों बढ़ रहे हैं मामले?
डोबो पूल की पहुंच आसान होने और इसकी एकांत जगह के कारण यह युवाओं के लिए अड्डा बन गया है। देर रात तक यहां भीड़ रहती है, और मानसिक तनाव, रिश्तों में विवाद, या छोटी-छोटी बातों पर लोग इस तरह के कठोर कदम उठा रहे हैं। सिटी एसपी ने इन घटनाओं को गंभीर चुनौती बताया और लोगों से अपील की कि वे अपनी समस्याएं परिवार से साझा करें।
प्रशासन का रवैया
स्थानीय लोगों ने बार-बार जिला प्रशासन से पूल के दोनों ओर जाली लगाने की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सिटी एसपी ने बताया कि अब 6 से 9 फीट ऊंची जाली लगाने की योजना है, और पूल के पास 24 घंटे पीसीआर वैन तैनात की गई है। फिर भी, प्रशासन की शुरुआती निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं।
समाज और पुलिस की अपील
पुलिस ने लोगों से छोटी-छोटी बातों पर आत्महत्या जैसे कदम न उठाने की अपील की है। सिटी एसपी ने कहा, “आपकी जिंदगी आपके परिवार के लिए कीमती है।” स्थानीय निवासियों का कहना है कि पूल के आसपास सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान की जरूरत है।
जाहिर है डोबो पूल की घटनाएं न केवल एक स्थानीय समस्या को उजागर करती हैं, बल्कि समाज में बढ़ते मानसिक दबाव और प्रशासनिक लापरवाही पर भी सवाल उठाती हैं।

















