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सूर्या हांसदा एनकाउंटर मामला: भाजपा की सात सदस्यीय जांच समिति ने गोड्डा में की परिजनों से मुलाकात, अर्जुन मुंडा ने लगाए गंभीर आरोप

गोड्डा : झारखंड के गोड्डा जिले में सूर्या हांसदा एनकाउंटर मामले की सच्चाई जानने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सात सदस्यीय जांच समिति ने रविवार को गोड्डा का दौरा किया। समिति में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी, प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही, पूर्व मंत्री रणधीर सिंह, पूर्व सांसद सुनील सोरेन, पूर्व विधायक अमित मंडल और अनिता सोरेन शामिल थे। इस दौरान भाजपा नेता लोबिन हेंब्रम भी मौजूद रहे।

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समिति ने स्वर्गीय सूर्या हांसदा के परिजनों से मुलाकात कर घटना की विस्तृत जानकारी ली। इसके साथ ही, समिति ने उस विद्यालय का दौरा किया, जिसे सूर्या हांसदा संचालित करते थे और जिसमें लगभग 350 बच्चे पढ़ते हैं। समिति के सदस्यों ने विद्यालय के बच्चों से भी बातचीत कर जानकारी प्राप्त की।

अर्जुन मुंडा ने लगाए गंभीर आरोप

मुलाकात के बाद प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अर्जुन मुंडा ने राज्य सरकार और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सूर्या हांसदा का परिवार ललमटिया क्षेत्र के पारंपरिक मांझी परिवार से है, जो स्वशासन व्यवस्था का प्रधान रहा है। वर्तमान में उनकी माता इस दायित्व को निभा रही हैं। सूर्या हांसदा सामाजिक और सांस्कृतिक दायित्वों का निर्वहन करते थे और विस्थापितों की समस्याओं सहित कई सामाजिक मुद्दों को उठाते रहे, जिसके चलते उनके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज किए गए।

मुंडा ने बताया कि सूर्या हांसदा 14 मुकदमों में बरी हो चुके थे, लेकिन उनके खिलाफ साजिश रची जाती रही। उन्होंने 27 मई को दर्ज एक मुकदमे को पूरी तरह फर्जी करार देते हुए कहा कि उस दिन सूर्या अपने बच्चे का जन्मदिन मना रहे थे। फिर भी, पुलिस ने बिना कोर्ट वारंट के उन्हें गिरफ्तार किया और साजिश के तहत उनकी हत्या कर दी।

“पुलिस का बयान और जनता की राय में विरोधाभास”

अर्जुन मुंडा ने कहा कि पुलिस सूर्या हांसदा को अपराधी बता रही है, जबकि उनका चरित्र समाजसेवी का था। वे एक स्कूल का संचालन करते थे, जिसके माध्यम से वे समाज की सेवा कर रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति समाज का भविष्य गढ़ने का काम करता हो, उसे पुलिस साजिश के तहत अपराधी कैसे बता सकती है? मुंडा ने यह भी बताया कि सूर्या हांसदा एक राजनीतिक कार्यकर्ता थे और उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से चार बार विधानसभा चुनाव लड़ा था।

“एनकाउंटर नहीं, साजिश के तहत हत्या”

मुंडा ने सूर्या हांसदा के एनकाउंटर को साजिश के तहत हत्या करार देते हुए कहा कि यह घटना झारखंड के लिए एक गंभीर सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के इशारे पर पोस्टमार्टम में भी गड़बड़ी की गई और प्रशासन लीपापोती में जुटा है। उन्होंने मांग की कि जनता और सूर्या हांसदा के परिवार को राज्य सरकार की जांच पर भरोसा नहीं है, इसलिए दोबारा पोस्टमार्टम कराकर रिपोर्ट तैयार की जाए और हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में निष्पक्ष जांच समिति गठित की जाए।

परिजनों की सुरक्षा और आंदोलन की चेतावनी

अर्जुन मुंडा ने सूर्या हांसदा के परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार खुद को आदिवासी समाज और पारंपरिक व्यवस्था का हितैषी मानती है, तो उसे इस मामले में स्पष्टीकरण देना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस मामले पर पुनर्विचार नहीं करती, तो भाजपा न्याय के लिए बड़ा आंदोलन शुरू करने को बाध्य होगी।

बाबूलाल मरांडी के निर्देश पर गठित समिति

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के निर्देश पर इस सात सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था। बाबूलाल मरांडी ने पहले ही इस एनकाउंटर को हत्या करार देते हुए हाईकोर्ट के सिटिंग जज से जांच की मांग की थी।

सूर्या हांसदा एनकाउंटर मामला

सूर्या हांसदा, जो ललमटिया थाना क्षेत्र के डकैता गांव के निवासी थे, उनको गोड्डा पुलिस ने 11 अगस्त 2025 को देर रात बोआरीजोर थाना क्षेत्र के जिरली समारी पहाड़ी के पास एनकाउंटर में मार गिराया था। पुलिस का दावा है कि सूर्या को देवघर के नावाडीह गांव से गिरफ्तार किया गया था और हथियार बरामद करने के दौरान उसने पुलिस की इंसास राइफल छीनकर भागने की कोशिश की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया।

हालांकि, इस एनकाउंटर पर कई सवाल उठ रहे हैं। सूर्या हांसदा के परिजनों और विपक्षी नेताओं ने इसे फर्जी एनकाउंटर करार दिया है। सूर्या के खिलाफ लूट, अपहरण और हत्या जैसे कई मामले दर्ज थे, लेकिन उनके समर्थकों और भाजपा नेताओं का कहना है कि वे सामाजिक कार्यकर्ता थे और खनन माफियाओं के खिलाफ आवाज उठाते थे।

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