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सिमडेगा नगर परिषद में निविदाओं की जांच: विवादों का नया अध्याय, डीसी के निर्देश पर गठित टीम ने की गहन पड़ताल

शंभू कुमार सिंह

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सिमडेगा : सिमडेगा नगर परिषद विवादों के घेरे में बना हुआ है। लगातार आ रही शिकायतों के बाद उपायुक्त (डीसी) के दिशा-निर्देश पर नगर परिषद द्वारा आमंत्रित निविदाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच शुरू हो गई है। ई-टेंडर संदर्भ संख्या UDD/SNP/08/2025-26, दिनांक 24 मई 2025 के तहत जारी 11 योजनाओं से जुड़े ‘व्हेरी शॉर्ट नोटिस इनवाइटिंग ई-टेंडर’ की इस जांच ने नगर परिषद के कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अपर समाहर्ता ज्ञानेंद्र के नेतृत्व में एक तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की। टीम में पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता और सहायक अभियंता शामिल हैं। जांच दल ने नगर परिषद कार्यालय पहुंचकर निविदा निस्तारण प्रक्रिया और निविदादाताओं से संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से समीक्षा की। सूत्रों के अनुसार, यह जांच कई संभावित अनियमितताओं को उजागर कर सकती है, जो जिले और राज्य स्तर पर चर्चा का विषय बन सकती हैं।

यह पहली बार नहीं है जब नगर परिषद पर विवादों का साया मंडरा रहा हो। पूर्व नगर प्रशासक समीर बोदरा के स्थानांतरण से ठीक पहले तत्कालीन उपायुक्त अजय कुमार सिंह ने परिषद के कार्यप्रणाली से नाराजगी जताते हुए कार्यालय कर्मियों को फटकार लगाई थी और फाइलें मंगवा ली थीं। बोदरा के स्थानांतरण के साथ ही कई विवाद सामने आए, जिसमें आनन-फानन में दो कर्मचारियों की बर्खास्तगी जिले में सुर्खियां बटोर चुकी है। बर्खास्त कर्मियों और सूत्रों का दावा है कि यदि गहन जांच हुई तो यह जिले का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।

वर्तमान में उपायुक्त कंचन सिंह के निर्देश पर गठित कमेटी की जांच से नगर परिषद को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। स्थानीय निवासी और व्यापारी वर्ग उम्मीद कर रहे हैं कि यह जांच पारदर्शिता लाएगी और अनियमितताओं पर अंकुश लगेगी। प्रशासन से उम्मीद है कि जांच रिपोर्ट जल्द सार्वजनिक की जाएगी, ताकि जनता को सच्चाई पता चल सके।

नगर परिषद के इन घटनाक्रम ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक बहस भी छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी जांचें विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं। फिलहाल, जांच जारी है और आगे की कार्रवाई का इंतजार है।

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