सिमडेगा के बानो में तुलसी पूजन दिवस पर भक्ति और प्रकृति संरक्षण का संदेश

सिमडेगा के बानो में तुलसी पूजन दिवस पर भक्ति और प्रकृति संरक्षण का संदेश

शंभू कुमार सिंह

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सिमडेगा : झारखंड के सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड स्थित हुरदा गांव में तुलसी पूजन दिवस बड़े उत्साह और भक्ति भाव से मनाया गया। शिव मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए। यह उत्सव आध्यात्मिक गुरु आशारामजी बापू द्वारा 2014 में शुरू किए गए तुलसी पूजन दिवस की परंपरा का हिस्सा था, जो हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाता है।

कार्यक्रम में भक्ति जागरण का माहौल रहा। संध्या देवी ने भक्ति रस में डूबकर कहा कि तुलसी-शालिग्राम पूजन न केवल व्यापक रूप ले रहा है, बल्कि यह प्रकृति संरक्षण को भी बढ़ावा देता है। उन्होंने बताया कि तुलसी पूजा से भगवान कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है। तुलसी को बच्चों के सेवन से स्मरण शक्ति, शरीर की मजबूती और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जिससे मौसम परिवर्तन और सामान्य रोगों से सुरक्षा मिलती है। तुलसी को संजीवनी बूटी कहा जाता है, जो शरीर, मन और वातावरण को स्वस्थ रखती है तथा अनेक बीमारियों में रामबाण औषधि का काम करती है।

संध्या देवी ने आगे कहा कि तुलसी पूजन का मुख्य उद्देश्य तुलसी, पीपल, नीम जैसे औषधीय पौधों का संरक्षण, रोपण और बचाव है। इन पौधों के पत्तों से अस्थमा, बुखार, सर्दी-खांसी और जुकाम जैसी बीमारियां दूर होती हैं। हिंदू धर्म में तुलसी को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। इस पूजा से आने वाली पीढ़ियां हमारी संस्कृति और पौधों के संरक्षण के महत्व को समझेंगी।

कार्यक्रम में घनश्याम दास, उषा देवी, अम्बिका देवी, रेणु देवी, शकुंतला देवी, कलावती देवी, सुखवती देवी, गीता देवी, रश्मी देवी, सावित्री देवी, बिनीता देवी सहित कई लोग उपस्थित थे।

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