State level workshop organized in Jharkhand on effective implementation of PESA Rules 2025

झारखंड में PESA नियमावली 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन पर राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित

State level workshop organized in Jharkhand on effective implementation of PESA Rules 2025
State level workshop organized in Jharkhand on effective implementation of PESA Rules 2025

रांची के धुर्वा स्थित प्रोजेक्ट भवन एनेक्सी सभागार में गुरुवार को पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली, 2025 यानी PESA कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में विभिन्न जिलों के उप विकास आयुक्त, बीडीओ, सीओ सहित कई प्रशासनिक पदाधिकारी शामिल हुए।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

कार्यशाला को संबोधित करते हुए झारखंड की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पाण्डेय सिंह ने कहा कि राज्य में 25 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद PESA कानून लागू किया गया है और अब इसे गांव-गांव तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ग्राम सभाओं को उनका अधिकार दिलाना सरकार की प्रतिबद्धता है और इसके लिए जमीनी स्तर पर मजबूत क्रियान्वयन जरूरी है।

मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर इस कानून को लागू किया गया है, ताकि पारंपरिक ग्राम व्यवस्थाओं को प्राथमिकता मिल सके। उन्होंने बताया कि देश के 10 राज्यों में लागू PESA कानूनों में झारखंड की नियमावली को सबसे बेहतर और प्रभावी माना जा रहा है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पारंपरिक व्यवस्था के तहत तीन महीने के भीतर ग्राम प्रधानों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि पारंपरिक ग्राम प्रधान और राजस्व ग्राम प्रधान की भूमिका को समझते हुए ग्राम सभा के माध्यम से चयन प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।

पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने कहा कि PESA नियमावली को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नियमावली का क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद कराया गया है, ताकि स्थानीय लोगों तक इसकी जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

उन्होंने जानकारी दी कि राज्यभर में 125 मास्टर ट्रेनरों को तैयार किया गया है, जो विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम चला रहे हैं। साथ ही कानून के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं के अध्ययन के लिए निदेशक की अध्यक्षता में विशेष समिति का गठन किया गया है।

कार्यशाला में पंचायती राज निदेशालय की निदेशक बी. राजेश्वरी ने कहा कि राज्य में PESA कानून लागू होना एक ऐतिहासिक कदम है। हालांकि इसके क्रियान्वयन के दौरान कई चुनौतियां सामने आई हैं, जिन्हें दूर करने के लिए लगातार सुधार की प्रक्रिया जारी है।

कार्यशाला के दौरान आयोजित तीन तकनीकी सत्रों में पारंपरिक ग्रामसभा की भूमिका, सामुदायिक भागीदारी, प्रशासनिक जिम्मेदारियों और परंपरागत स्वशासन को प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में शामिल करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों के बीच खुला संवाद भी हुआ, जिसमें बेहतर क्रियान्वयन के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए।

नई और ताज़ा खबरों के लिए जुड़े रहें — Drishti Now