मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की 122वीं जयंती पर भारत आदिवासी पार्टी का संदेश: संविधान निर्माता के विचार आज भी आदिवासी संघर्ष की दिशा तय करते हैं
शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा : आदिवासी समाज के महान नेता, झारखंड आंदोलन के प्रणेता, अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी और भारतीय संविधान सभा के सदस्य मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की 122वीं जयंती पर भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) सिमडेगा जिला इकाई ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पार्टी ने इस अवसर को संकल्प दिवस के रूप में मनाते हुए आदिवासी अधिकारों, अस्मिता और स्वशासन की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत आदिवासी पार्टी सिमडेगा जिला अध्यक्ष अमृत चिराग तिर्की और जिला महासचिव अलेक्स जॉनसन केरकेट्टा ने संयुक्त बयान में कहा कि मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा को आदिवासी समाज ने “मारंग गोमके” (महान नेता) की उपाधि दी थी, क्योंकि वे न केवल एक राजनीतिक नेता थे, बल्कि पूरे आदिवासी समुदाय के मार्गदर्शक, संरक्षक और सशक्त आवाज थे। राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उन्होंने आदिवासियों के अधिकारों, अस्मिता और स्वशासन की पैरवी निर्भीकता से की।
जिला अध्यक्ष अमृत चिराग तिर्की ने कहा, “मारंग गोमके ने संविधान सभा में अपने ऐतिहासिक भाषणों के माध्यम से स्पष्ट किया था कि आदिवासी समाज के लिए जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और स्वशासन जीवन का आधार हैं। आज जब इन संवैधानिक अधिकारों पर अतिक्रमण की कोशिशें हो रही हैं, तब उनके विचार और भी प्रासंगिक हो गए हैं। यदि आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा नहीं हुई, तो लोकतंत्र अधूरा रहेगा।”
जिला महासचिव अलेक्स जॉनसन केरकेट्टा ने कहा, “मारंग गोमके का सपना एक ऐसे भारत और झारखंड का था, जहां आदिवासियों को मात्र वोट बैंक नहीं समझा जाए, बल्कि उन्हें सम्मान, निर्णय लेने का अधिकार और वास्तविक स्वशासन प्राप्त हो। भारत आदिवासी पार्टी उनकी इसी संवैधानिक और वैचारिक विरासत को आगे बढ़ा रही है तथा जमीनी स्तर पर आदिवासी हितों की लड़ाई लड़ रही है। हम किसी भी हालत में आदिवासी अस्मिता से समझौता नहीं करेंगे।”
पार्टी नेताओं ने इस जयंती को केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि संविधान, अधिकारों और स्वशासन के प्रति नए संकल्प का दिन बताया। उन्होंने अपील की कि आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास और अधिकारों से जुड़ी रहें तथा मारंग गोमके के विचारों को सामाजिक, शैक्षणिक और संवैधानिक संघर्षों में आत्मसात करें।
अंत में, भारत आदिवासी पार्टी सिमडेगा जिला इकाई ने सभी जिला वासियों से आह्वान किया कि वे इस जयंती को संकल्प दिवस के रूप में मनाएं और आदिवासी एकता को मजबूत बनाएं।

















