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सिमडेगा डीसी की संवेदनशीलता की मिसाल: “ये हैं देवानन्द” – एक मार्मिक कहानी जो दिल छू गई

शंभू कुमार सिंह 

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सिमडेगा जिले की उपायुक्त (डीसी) कंचन सिंह अपनी सादगी, कार्यकुशलता और जनता के प्रति गहरी संवेदनशीलता के लिए लगातार चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर उनके द्वारा साझा किया गया एक मार्मिक लेख “ये हैं देवानन्द” लोगों के दिलों को छू रहा है। यह लेख न केवल एक बच्चे की मासूमियत और संघर्ष की कहानी बयां करता है, बल्कि प्रशासन की मानवीयता और जिम्मेदारी को भी उजागर करता है।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड की सीमा पर स्थित डाडिंग एक खूबसूरत पर्यटक स्थल है, जहां दक्षिणी कोयल नदी चट्टानों और गुफाओं के बीच बहती है। यहां पर्यटकों की सुरक्षा और सफाई के लिए स्थानीय युवाओं को “पर्यटक मित्र” के रूप में नियुक्त किया गया है।

एक दिन डीसी कंचन सिंह जब वहां पहुंचीं, तो एक पर्यटक मित्र के पीछे छिपकर झांकते एक छोटे बच्चे ने उनका ध्यान खींचा। बच्चा सुबह से डीसी का इंतजार कर रहा था और कई लोगों को डीसी समझकर पूछ चुका था। जब बच्चे से नाम पूछा गया, तो उसने उत्साह से बताया – देवानन्द, पिता का नाम अर्जुन।

बातचीत में पता चला कि देवानन्द स्कूल नहीं जाता क्योंकि उसके पिता उसे अकेला नहीं छोड़ते। वजह सुनकर सब स्तब्ध रह गए – देवानन्द को सिकल सेल एनीमिया है, जिसकी जटिलताओं के कारण इलाज लंबा चल रहा है।

डीसी ने तुरंत प्रखंड विकास पदाधिकारी को बच्चे का इलाज अपनी निगरानी में करवाने का और घर पर ही पढ़ाई का इंतजाम करने, किताबें उपलब्ध करवाने का निर्देश दिए।

बच्चे की तीक्ष्ण बुद्धि और मासूम हंसी ने सबका दिल जीत लिया। उसने गाड़ी पर चढ़कर बैठने की इच्छा जताई, और उसी पल डीसी ने उसकी तस्वीर ले ली – जो अब इस भावुक कहानी का प्रतीक बन गई है।

यह घटना संयोग से दिशोम गुरु शिबू सोरेन की 82वीं जयंती के दिन हुई। उसी दिन रांची में मुख्यमंत्री के उद्बोधन में कहा गया कि दिशोम गुरु का सपना था – झारखंड का हर बच्चा पढ़े। डीसी ने लिखा कि हम सब मिलकर ही ऐसे बच्चों की मदद कर सकते हैं, ताकि कोई भी शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण से वंचित न रहे।

उन्होंने लोगों से अपील की है कि ऐसे जरूरतमंद बच्चों की जानकारी व्हाट्सएप नंबर 94315 81591 पर भेजें, ताकि उनकी टीम समय पर सहायता पहुंचा सके।

मई 2025 में पदभार ग्रहण करने के बाद से ही डीसी कंचन सिंह ने अपनी संवेदनशीलता और सक्रियता से लोगों का दिल जीता है। सहज सेल्फी, ग्रामीणों से मिलना-जुलना और त्वरित कार्रवाई उनकी खासियत बन गई है। सिकल सेल एनीमिया जैसे मुद्दों पर भी वे सक्रिय हैं, जैसा कि ब्लड बैंक निरीक्षण और अस्पताल दौरों में दिखता है।

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