आदित्य साहू ने बसंत पंचमी पर संभाला झारखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का पदभार, राज्य में डबल इंजन सरकार बनाने का लिया संकल्प
रांची : वसंत पंचमी के पावन अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने आज प्रदेश कार्यालय में विधिवत रूप से पदभार ग्रहण किया। कार्यक्रम में पूजा-अर्चना, हवन और सरस्वती पूजन के बाद निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने श्री साहू को अध्यक्ष पद पर आसीन किया तथा पुष्पगुच्छ और मिठाई देकर बधाई दी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इस अवसर पर प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष यदुनाथ पांडेय, डॉ. रविंद्र कुमार राय, दीपक प्रकाश, प्रदेश उपाध्यक्ष बालमुकुंद सहाय, विकास प्रीतम, आरती कुजूर, प्रदेश महामंत्री एवम सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा सहित मनोज कुमार सिंह, गणेश मिश्र, सरोज सिंह, सुनीता सिंह, मुन्ना मिश्र, दुर्गा मरांडी, मनोज महतो वाजपेयी और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी एवं सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
पदभार ग्रहण के बाद श्री साहू ने कहा, “झारखंड भाजपा की उर्वरा भूमि है। यहां कार्यकर्ताओं में जोश, ऊर्जा और देश-राज्य की सेवा का जज्बा है। कार्यकर्ताओं की ताकत से हम बूथ स्तर से प्रदेश तक संगठन को मजबूत और धारदार बनाएंगे तथा राज्य में व्याप्त कुशासन के खिलाफ संघर्ष करेंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा ने झारखंड राज्य गठन की पीड़ा सही है और यह झारखंड भाजपा की देन है। श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों का झारखंड अभी बनाना बाकी है। आज वसंत पंचमी पर सभी संकल्प लें कि राज्य में सुशासन लाने के लिए जूझेंगे और भाजपा के नेतृत्व में मजबूत डबल इंजन सरकार बनाएंगे।
नेता जी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर नमन करते हुए आदित्य साहू ने कहा कि नेताजी का झारखंड की धरती से गहरा नाता था। उन्होंने यहां से अंग्रेजों के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। आज उन्हें याद करते हुए हम गांव, गरीब, किसान, आदिवासी, दलित, पिछड़े विरोधी राज्य सरकार को उखाड़ फेंकने का संकल्प लें।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने नए अध्यक्ष को जमीनी स्तर के जुझारू कार्यकर्ता बताते हुए कहा, “आदित्य साहू की झारखंड की मिट्टी में गहरी पकड़ है। इनके नेतृत्व में पार्टी और मजबूत होगी।” प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने आदित्य साहू के यशस्वी कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं।

















