सुप्रीम कोर्ट की WhatsApp-Meta पर तगड़ी फटकार: “प्राइवेसी से खिलवाड़ नहीं बर्दाश्त, “प्राइवेसी का हक सर्वोपरि”
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने आज व्हाट्सएप और उसकी पैरेंट कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स को डेटा प्राइवेसी के मामले में करारा झटका दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मेटा को साफ-साफ चेतावनी दी कि भारतीय नागरिकों की निजता के अधिकार से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कोर्ट ने कहा, “हम आपको देश की प्राइवेसी के साथ खेलने की इजाजत नहीं देंगे। आप भारतीयों के डेटा से खिलवाड़ नहीं कर सकते। अगर संविधान का पालन नहीं कर सकते, तो भारत छोड़ दें।” CJI ने यह भी टिप्पणी की कि व्हाट्सएप की ‘टेक इट ऑर लीव इट’ वाली प्राइवेसी पॉलिसी आम आदमी के लिए समझना मुश्किल है। उन्होंने पूछा, “क्या सड़क पर सब्जी बेचने वाली गरीब महिला आपकी अंग्रेजी शर्तों को समझ पाएगी? यह निजी जानकारी की चोरी का एक सभ्य तरीका है – और हम इसकी इजाजत नहीं देंगे।”
यह सुनवाई व्हाट्सएप की 2021 प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ी है, जिसमें यूजर्स का डेटा मेटा की अन्य कंपनियों के साथ शेयर करने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने मेटा और व्हाट्सएप को सख्त निर्देश दिया कि वे लिखित हलफनामा दाखिल करें कि यूजर डेटा का व्यावसायिक इस्तेमाल (जैसे टारगेटेड ऐड्स के लिए) नहीं किया जाएगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो अदालत आगे सुनवाई नहीं करेगी और अंतरिम आदेश पारित कर सकती है। कोर्ट ने 9 फरवरी को अंतरिम आदेश देने की बात कही है।
यह फैसला लाखों-करोड़ों भारतीय व्हाट्सएप यूजर्स के लिए बड़ी राहत की खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निजता का अधिकार संविधान के तहत मौलिक अधिकार है, और कोई भी बड़ी टेक कंपनी इसे कमजोर नहीं कर सकती। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिजिटल प्राइवेसी के क्षेत्र में भारत के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
अगली सुनवाई में क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने बड़े टेक दिग्गजों को साफ संदेश दे दिया है – भारत में प्राइवेसी सबसे ऊपर है!


















