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स्कॉलरशिप के इंतजार में टूटी उम्मीदें: झारखंड के छात्र ने बहन की शादी के लिए रखे पैसे से भरी कॉलेज फीस, वीडियो वायरल

स्कॉलरशिप के इंतजार में टूटी उम्मीदें: झारखंड के छात्र ने बहन की शादी के लिए रखे पैसे से भरी कॉलेज फीस, वीडियो वायरल

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धनबाद, 03 फरवरी  — झारखंड के धनबाद जिले के गोविंदपुर इलाके से एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। एक छात्र ने आंसुओं और गुस्से के बीच अपनी मजबूरी बयान की है—सरकार की स्कॉलरशिप न मिलने के कारण उसे अपनी बहन की शादी के लिए परिवार ने सालों से जोड़े गए 1.50 लाख रुपये कॉलेज की फीस में जमा करने पड़े।

इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था में स्कॉलरशिप वितरण की गंभीर कमियों पर भी सवाल खड़े कर दिए है।

वीडियो में क्या कहा छात्र ने?

छात्र मोबाइल कैमरे के सामने बोलता है। उसके हाथ में नोटों की गड्डियां हैं। वह बताता है:उसने अल-इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज (Al Ikra Teachers Training College), गोविंदपुर, धनबाद में दाखिला लिया था।
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद ई-कल्याण (E-Kalyan) पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप के भरोसे पढ़ाई शुरू की।
लेकिन स्कॉलरशिप में बार-बार देरी हुई। कॉलेज ने साफ कह दिया—1.50 लाख रुपये फीस जमा नहीं हुई तो बोनाफाइड सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा।
बोनाफाइड सर्टिफिकेट स्कॉलरशिप प्रक्रिया के लिए अनिवार्य है, और इसके बिना आगे की पढ़ाई, परीक्षा और नौकरी के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
मजबूरी में परिवार ने बहन की शादी के लिए जमा किए पैसे दे दिए। छात्र भावुक होकर कहता है, “सच बताऊं, ये पैसे बहन की शादी के लिए थे… लेकिन अब पढ़ाई बचाने के लिए देना पड़ रहा है।”
वह आगे चेतावनी देता है कि अगर स्कॉलरशिप नहीं मिली तो वह  कोई बड़ा कदम उठा सकता है।

वीडियो में उसकी आवाज कई बार टूटती है, आंखों में दर्द और बेबसी साफ झलकती है। यह वीडियो फरवरी 2026 की शुरुआत में वायरल हुआ और लाखों व्यूज प्राप्त कर चुका है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

समर्थन करने वाले: कई यूजर्स इसे सरकार और सिस्टम की नाकामी बता रहे हैं। गरीब छात्रों के सपनों पर सवाल उठा रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “एक भाई अपनी बहन की खुशियां कुर्बान कर पढ़ाई बचा रहा है—यह दुखद है।”
आलोचक: कुछ का कहना है कि प्राइवेट कॉलेज महंगे होते हैं, दाखिला लेते समय पता होता है। अगर आर्थिक स्थिति कमजोर है तो सरकारी संस्थान चुनना चाहिए। एक यूजर ने कहा, “वीडियो में नोटों की गड्डी दिख रही है, शायद ड्रामा है।”

कॉलेज प्रबंधन का पक्ष

अल-इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज के सचिव डॉ. एस. खालिद ने कहा:स्कॉलरशिप का मामला पूरी तरह राज्य सरकार (ई-कल्याण पोर्टल) के अधीन है, कॉलेज का इसमें कोई रोल नहीं।
फीस न भरने पर स्टाफ वेतन और कॉलेज संचालन प्रभावित होता है।छात्र को समस्या बताकर सीधे कॉलेज आना चाहिए था, मदद मिल सकती थी।
वीडियो वायरल कर आरोप लगाना गलत है। छात्र एक ब्लॉगर भी है, शायद व्यूज से कमाई का इरादा हो।
पहले भी कई छात्रों की मदद की जा चुकी है।

यह घटना क्या संदेश दे रही है?

झारखंड में हजारों छात्र पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप (E-Kalyan) पर निर्भर हैं, खासकर प्राइवेट टीचर ट्रेनिंग कॉलेजों (B.Ed/D.El.Ed) में जहां फीस 1-2 लाख तक होती है। देरी से कई छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। यह मामला शिक्षा के अधिकार, स्कॉलरशिप वितरण की सुस्ती, प्राइवेट संस्थानों की फीस संरचना और गरीब परिवारों की मजबूरियों को उजागर करता है।अभी तक सरकार या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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