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बाबूलाल मरांडी ने झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को बताया अवैध, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर की वेतन वसूली और संपत्ति जांच की मांग

रांची: पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश और प्रकाश सिंह जजमेंट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अब झारखंड सरकार को यूपीएससी से अनुमोदित पैनल से ही डीजीपी की नियुक्ति करनी होगी।

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बाबूलाल मरांडी ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि रिटायरमेंट के बाद भी तदाशा मिश्रा गैर-कानूनी तरीके से डीजीपी पद पर बनी हुई हैं। उन्होंने उन्हें अपेक्षाकृत बेहतर अधिकारी बताते हुए सलाह दी कि वे स्वयं पद छोड़कर नैतिकता का पालन करें, वरना सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत उन्हें हटाया जा सकता है।

मरांडी ने सवाल उठाया कि सेवा काल में विवादों से दूर रहने वाली एक अच्छी अधिकारी आखिर क्यों अपने पूरे करियर की छवि को दागदार करना चाहती हैं और हंसी का पात्र बनना चाहती हैं?

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई यहीं नहीं रुकेगी। झारखंड में अब तक गलत तरीके से नियुक्त सभी डीजीपी के वेतन एवं अन्य मदों की राशि की वसूली, उनके द्वारा किए गए कार्यों को रद्द करने और उनकी अवैध संपत्ति की जांच कराने के लिए वे हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक जाने को तैयार हैं।

मरांडी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के नवीनतम आदेश से यह साफ हो गया है कि उनकी लंबी कानूनी लड़ाई रंग लाई है और राज्य सरकार की मनमानी अब नहीं चलेगी। उन्होंने सरकार से अपील की कि प्रकाश सिंह जजमेंट के तहत एक महीने के भीतर यूपीएससी पैनल से डीजीपी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करें।

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