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सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाहक DGP की निंदा की , कहा राज्यो को भाते है कार्यवाहक DGP

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सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों पर साधा निशाना: नियमित डीजीपी की बजाय कार्यवाहक को प्राथमिकता, UPSC को अवमानना कार्रवाई का अधिकार

डेस्क, 5 फरवरी : सुप्रीम कोर्ट ने कई राज्यों द्वारा पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियमित नियुक्ति में हो रही अत्यधिक देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारें प्रकाश सिंह मामले में जारी दिशानिर्देशों की अनदेखी कर रही हैं और नियमित डीजीपी के बजाय कार्यवाहक (एक्टिंग) डीजीपी की नियुक्ति को तरजीह दे रही हैं, क्योंकि यह उन्हें राजनीतिक रूप से सुविधाजनक लगता है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को स्पष्ट अधिकार दिया कि वह राज्यों को समय पर प्रस्ताव भेजने के लिए रिमाइंडर जारी करे। यदि कोई राज्य समय पर प्रस्ताव नहीं भेजता, तो यूपीएससी प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अवमानना (कंटेम्प्ट) की याचिका दायर कर सकेगी।

कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा, “राज्यों के झांसे में न आएं। वे कभी भी नियमित डीजीपी पसंद नहीं करेंगे, वे कोई कार्यवाहक डीजीपी, चाहते हैं जो उनके अनुकूल हो।”

प्रकाश सिंह केस के दिशानिर्देश

2006 के प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस सुधारों के लिए महत्वपूर्ण गाइडलाइंस जारी की थीं:राज्य सरकार को डीजीपी की नियुक्ति तीन सबसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के पैनल से करनी होगी, जिन्हें यूपीएससी ने एम्पैनल किया हो।
प्रस्ताव डीजीपी के रिटायरमेंट से कम से कम तीन महीने पहले भेजा जाना चाहिए।
नियुक्त डीजीपी का न्यूनतम दो साल का निश्चित कार्यकाल होना चाहिए।

2018 में कोर्ट ने इसे और सख्त किया था।कोर्ट के मुख्य निर्देश

यूपीएससी को राज्यों को समय पर प्रस्ताव भेजने के लिए लिखित रूप से याद दिलाने का अधिकार।
देरी होने पर प्रकाश सिंह मामले में कोर्ट में आवेदन दायर करने की छूट।

 

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