उपायुक्त का आश्वासन सिर्फ छलावा? निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन ने खोला मोर्चा

रांची : राजधानी रांची के निजी स्कूलों द्वारा की जा रही बेतहाशा फीस वृद्धि और विभिन्न शुल्कों के नाम पर हो रही “अवैध वसूली” ने अभिभावकों की कमर तोड़ दी है। इस गंभीर मुद्दे पर झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। एसोसिएशन का कहना है कि उपायुक्त (DC) के आश्वासनों के बावजूद जमीनी स्तर पर अभिभावकों को कोई इंसाफ नहीं मिला है।
बैठक रद्द होने से टूटी उम्मीदें
एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय राय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि 21 अप्रैल को निजी स्कूल प्रबंधन और जिला प्रशासन के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक होनी तय थी। अभिभावकों को उम्मीद थी कि इस बैठक में झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम 2017 को सख्ती से लागू करने पर फैसला होगा, लेकिन बैठक टल जाने से अभिभावक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
अजय राय ने प्रशासन से पूछे ये 5 तीखे सवाल
1. फीस वृद्धि पर चुप्पी क्यों: सत्र 2026-27 के लिए स्कूलों ने मनमाने ढंग से फीस बढ़ा दी है, प्रशासन मौन क्यों है?
2. अवैध वसूली का खेल: एनुअल चार्ज, डेवलपमेंट चार्ज और कंप्यूटर फीस के नाम पर अभिभावकों की जेब क्यों काटी जा रही है?
3. किताबों का सिंडिकेट: CBSE/ICSE के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी स्कूल अपनी वेबसाइट पर किताबों की सूची क्यों नहीं डाल रहे? अभिभावकों को खास दुकानों से ही सामान खरीदने पर मजबूर क्यों किया जा रहा है?
4. कमेटी सिर्फ कागजों पर: जिला स्तरीय फीस निर्धारण समिति के गठन का क्या लाभ, जब इसकी न तो बैठक होती है और न ही कोई कार्रवाई?
5. दोषियों पर नरमी क्यों: नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ अब तक दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
अभिभावकों की मुख्य मांगें
झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें स्पष्ट कर दी हैं:
तत्काल बैठक: जिला स्तरीय फीस समिति की बैठक बुलाकर ठोस निर्णय लिए जाएं।
जांच का दायरा: सभी निजी स्कूलों की फीस संरचना (Fee Structure) की गहन जांच हो।
पारदर्शिता: किताबों और यूनिफॉर्म की बिक्री में कमीशन का खेल बंद कर पारदर्शिता लाई जाए।
दंडात्मक कार्रवाई: अवैध वसूली करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई हो।
झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय राय ने कहा “प्रशासन के आश्वासन और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है। अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होगा।”
















