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वाह रे न्याय व्यवस्था ! 34 साल पुराने हत्या के प्रयास के मामले में 85 वर्षीय दीप राय दोषी ठहराए गए, लेकिन उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए मिली राहत

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हाजीपुर (वैशाली), : ये सत्य घटना जितनी बार आप पढ़ेंगे देश ली न्याय व्यवस्था पर आपको आश्चर्य होगा । दरसल बिहार के वैशाली जिले के हाजीपुर कोर्ट ने एक लंबे इंतजार के बाद 34 साल पुराने हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) के मामले में फैसला सुनाया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी की अदालत ने मुख्य आरोपी 85 वर्षीय दीप राय (उर्फ दीपा राय या जिसा राय) को दोषी करार दिया।कोर्ट ने उन्हें 3 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई और 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। हालांकि, दीप राय की उम्र, शारीरिक स्थिति (आर्थराइटिस और अल्जाइमर जैसी बीमारियां) और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अंतरिम जमानत (provisional bail) प्रदान कर दी। फैसले के तुरंत बाद उन्हें जेल भेजा गया, लेकिन उसी दिन जमानत पर रिहा कर दिया गया।

मामला क्या था?

घटना 10 दिसंबर 1992 की है। वैशाली जिले के राघोपुर ब्लॉक के जुरावनपुर गांव में जमीन और रास्ते के विवाद को लेकर दीप राय समेत आरोपियों पर शिकायतकर्ता अदालत राय और उनकी पत्नी रामशकी देवी पर हमला करने का आरोप था। आरोप था कि आरोपियों ने कांच के टुकड़े बिखेर दिए, गाली-गलौज की और फिर देशी बंदूक से फायरिंग कर दी। अदालत राय गंभीर रूप से घायल हुए थे।

FIR 11 दिसंबर 1992 को दर्ज हुई और चार्जशीट 1993 में दाखिल हुई। केस IPC की धाराओं 147, 148, 149, 307 और Arms Act के तहत चला। कुल 9 आरोपी थे, जिनमें से 4 की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है।

कोर्ट का फैसला और राहत

अदालत ने दीप राय समेत पांच जीवित आरोपियों को दोषी ठहराया। अन्य चार आरोपियों को 10-10 साल की सजा और 25-25 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। दीप राय को उनकी उम्र (84-85 वर्ष) और पूरी तरह से शारीरिक रूप से अक्षम होने को देखते हुए कम सजा दी गई। जज ने फैसले में लिखा कि आरोपी बुजुर्ग है और उनकी सेहत को देखते हुए लंबी कैद उचित नहीं होगी।

दीप राय की हालत

दीप राय अब चलने-फिरने में असमर्थ हैं। वे लाठी और दूसरों के सहारे कोर्ट पहुंचे। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें दो लोग उन्हें सहारा देते नजर आए। गांव में परिवार दूध बेचकर और खेती से गुजारा करता है। दीप राय का कहना है कि उन्होंने कुछ नहीं किया और घटना के समय वहां नहीं थे।शिकायतकर्ता अदालत राय अब गांव छोड़कर पटना के पास रह रहे हैं और न्याय मिलने पर संतोष जताया है, हालांकि परिवार अपील की तैयारी कर रहा है।

न्याय व्यवस्था पर सवाल

यह मामला भारतीय न्याय व्यवस्था में देरी का जीवंत उदाहरण है। 34 साल लग गए फैसला आने में। बिहार में लाखों मामले पेंडिंग हैं। इस फैसले ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है — अपराध की सजा आखिरकार मिलती है, लेकिन इतनी देरी उचित है या नहीं?

 

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