कांके अंचलाधिकारी अमित भगत की पारदर्शी पहल, CBI की सीज जमीन का म्यूटेशन किया रद्द

रांची: लंबे समय से विवादों और भू-माफिया से कथित सांठगांठ के आरोपों को लेकर चर्चा में रहे कांके अंचल कार्यालय में अब पारदर्शी और नियमसम्मत प्रशासनिक कार्रवाई की नई पहल देखने को मिली है। वर्तमान अंचलाधिकारी (सीओ) अमित भगत ने CBI द्वारा पहले से सीज (जब्त) की जा चुकी जमीन के म्यूटेशन के दो मामलों को निरस्त कर कानून के अनुपालन का स्पष्ट संदेश दिया है।

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जानकारी के अनुसार, मौजा अरसंडे की संवेदनशील एवं विवादित भूमि से जुड़े दो अलग-अलग दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) मामलों में आवेदक संजय कुमार दुबे ने खाता संख्या-1 एवं प्लॉट संख्या-2246 की कुल 27.20 डिसमिल भूमि के नामांतरण का आवेदन दिया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अंचलाधिकारी अमित भगत ने तत्काल जांच के निर्देश दिए।
राजस्व कर्मचारी और अंचल निरीक्षक की संयुक्त टीम ने स्थल निरीक्षण के साथ-साथ संबंधित अभिलेखों, केवाला, खतियान और पंजी-2 का मिलान किया। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि संबंधित भूमि विशेष न्यायालय (सीबीआई) के आदेश के तहत वर्ष 2014 से ही सीज (जब्त) है।
जांच रिपोर्ट के आधार पर अंचलाधिकारी अमित भगत ने दोनों म्यूटेशन मामलों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। अपने आदेश में उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब कोई भूमि CBI द्वारा सीज की जा चुकी हो, तब उसका दाखिल-खारिज करना कानूनन संभव नहीं है। ऐसे मामलों में न्यायालय के आदेश सर्वोपरि हैं और उनका अक्षरशः पालन किया जाना आवश्यक है।
गौरतलब है कि कांके अंचल पूर्व में फर्जी दस्तावेजों, बैकडेटिंग और संदिग्ध प्रक्रियाओं के माध्यम से सरकारी एवं विवादित जमीनों के अवैध म्यूटेशन के आरोपों को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे माहौल में वर्तमान अंचलाधिकारी द्वारा की गई यह कार्रवाई प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकारी अभिलेखों और न्यायालय के आदेशों के विपरीत किसी भी प्रकार की कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी। वहीं स्थानीय स्तर पर इस निर्णय को कानून के शासन को मजबूत करने और भू-माफियाओं पर सख्ती के रूप में देखा जा रहा है।
















