Jpsc controversy

14वीं JPSC विवाद: पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते बोले- निष्पक्ष जांच के लिए दिया इस्तीफा, राज्य गठन के बाद की सभी परीक्षाओं की हो उच्चस्तरीय जांच

  • Jpsc controversy

रांची: 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC ) संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर मचे घमासान और जारी विवाद के बीच आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने एक मीडिया साक्षात्कार में कई बड़े खुलासे किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच को प्रभावित होने से बचाने और पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उन्होंने स्वतः अपने पद से इस्तीफा दिया है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

इस्तीफे पर क्या बोले पूर्व अध्यक्ष?

अचानक दिए गए इस्तीफे को लेकर पूछे गए सवाल पर एल. खियांग्ते ने कहा कि जब आयोग की जांच शुरू हुई, तब उन्होंने महसूस किया कि उनके पद पर बने रहने से जांच निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं। उन्होंने कहा, “मैंने किसी दबाव में इस्तीफा नहीं दिया है। जब जांच का दायरा बढ़ रहा था, तो यह जरूरी था कि जांच एजेंसी पूरी तरह स्वतंत्र होकर काम करे। अब मैं एक साधारण नागरिक हूं और जांच में पूरा सहयोग दूंगा।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पद पर रहते हुए जो लक्ष्य उन्होंने तय किए थे, वे पूरे नहीं हो पाए, जिसका उन्हें मलाल है।

ब्लैकलिस्टेड कंपनी और ओएमआर गड़बड़ी पर सफाई

ब्लैकलिस्टेड कंपनी को काम मिलने पर: पूर्व अध्यक्ष ने सफाई देते हुए कहा कि कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति कभी नहीं चाहेगा कि किसी ब्लैकलिस्टेड कंपनी को परीक्षा से जुड़ा काम मिले। उन्होंने कहा कि एजेंसी का चयन उसकी क्षमता और संसाधनों को देखकर किया गया था। यदि उस समय कंपनी के ब्लैकलिस्टेड होने की जानकारी होती, तो उसे यह जिम्मेदारी बिल्कुल नहीं दी जाती।

मुआवजा राशि हड़पने और जातिसूचक टिप्पणी के आरोपी मनोज भगत गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजा गया

बिना हस्ताक्षर वाले रिजल्ट और OMR विवाद: ओएमआर शीट और बिना हस्ताक्षर के पीटी रिजल्ट जारी होने के आरोपों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘रूल ऑफ प्रोसिजर 2002’ के मुताबिक, सदस्यों की स्क्रूटनी की भूमिका केवल इंटरव्यू के बाद फाइनल मेरिट लिस्ट तैयार करते समय होती है, उससे पहले के चरणों में सदस्यों की ऐसी कोई भूमिका निर्धारित नहीं है।

राज्य गठन के बाद की सभी परीक्षाओं की हो व्यापक जांच

एल. खियांग्ते ने पुरजोर वकालत करते हुए कहा कि केवल एक परीक्षा तक सीमित रहने के बजाय, झारखंड राज्य गठन के बाद से अब तक जेपीएससी द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनके अनुसार, ऐसा होने से सभी तरह की शंकाएं, अविश्वास और विवाद हमेशा के लिए समाप्त हो जाएंगे तथा युवाओं का आयोग के प्रति खोया हुआ भरोसा फिर से बहाल हो सकेगा।

नई और ताज़ा खबरों के लिए जुड़े रहें — Drishti Now