Jpsc controversy

JPSC परीक्षा घोटाला: पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से तीसरे दिन भी 9 घंटे पूछताछ, PT परीक्षा रद्द होने की संभावना तेज

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रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच लगातार तेज होती जा रही है। सीआईडी ने आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन करीब नौ घंटे तक पूछताछ की। देर शाम उन्हें घर जाने की अनुमति दी गई, लेकिन जांच एजेंसी ने सोमवार को फिर तलब किया है।

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जांच में अब तक मिले साक्ष्यों और गिरफ्तार अभ्यर्थी सुमन सौरभ के स्वीकारोक्ति बयान के बाद सीआईडी इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि प्रारंभिक परीक्षा में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं। ऐसे में 14वीं JPSC पीटी परीक्षा रद्द किए जाने की संभावना भी मजबूत मानी जा रही है।

सीआईडी की अपील के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपनी ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी जांच के लिए भेज रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार इन दस्तावेजों में भी कई अनियमितताएं सामने आ रही हैं।

सुमन सौरभ की गिरफ्तारी से मिले अहम सुराग

हजारीबाग से गिरफ्तार अभ्यर्थी सुमन सौरभ ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने परीक्षा में केवल 48 प्रश्नों के उत्तर भरे थे, फिर भी उसे सफल घोषित कर दिया गया। जांच के दौरान उसके पास मिली ओएमआर शीट आयोग के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाई। इस खुलासे ने परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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2204 अभ्यर्थियों का परिणाम हुआ था घोषित

14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा 19 अप्रैल 2026 को राज्यभर के 564 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित हुई थी। 2 जुलाई को परिणाम जारी करते हुए 2204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया था। मुख्य परीक्षा 2 से 27 जुलाई के बीच प्रस्तावित थी, लेकिन अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद इसे स्थगित कर दिया गया।

रिमांड के बाद आरोपियों को भेजा गया जेल

सीआईडी ने रिमांड पर लिए गए तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर मनोज तिवारी, तकनीकी प्रोग्रामर मो. उस्मान और मो. एजाद समेत अन्य कर्मियों से पूछताछ के बाद उन्हें जेल भेज दिया। बाद में इनकी रिमांड दो दिनों के लिए और बढ़ाई गई तथा पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते के सामने बैठाकर भी पूछताछ की गई।

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अब JPSC के अन्य सदस्यों पर भी जांच की नजर

सीआईडी अब आयोग के कुछ अन्य सदस्यों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। शुक्रवार की पूछताछ में एल. खियांग्ते से भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा संचालन, चयन प्रक्रिया और निजी एजेंसी टीडीपीएल की भूमिका को लेकर सवाल पूछे गए। उनसे यह भी जानना चाहा गया कि ओएमआर शीट निजी एजेंसी के कार्यालय तक कैसे पहुंची और उसमें कथित छेड़छाड़ के लिए जिम्मेदार कौन है। हालांकि सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान उन्होंने किसी भी सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

जांच के दौरान जेपीएससी और टीडीपीएल के कार्यालयों में हुई तलाशी में कई ओएमआर शीट बरामद हुई हैं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर सीआईडी परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ी की पूरी परतें खोलने की कोशिश कर रही है।

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